केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान है. वह उन्हें कम भी करना चाहती है. लेकिन इन पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कटौती कर के कीमतें नहीं घटाना चाहती. लिहाज़ा जैसा सूत्र बताते हैं, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम रखने का बोझ ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के कंधों पर डालने का विचाार किया जा रहा है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के मसले पर गुरुवार देर शाम केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद प्रधान के घर पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी. इसी बैठक में यह तय किया गया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम रखने की ज़िम्मेदारी ओएनजीसी को दी जा सकती है. उसे यह निर्देश दिया जा सकता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय कीमतों से कम दाम पर पेट्रोलियम कंपनियों को कच्चे तेल की आपूर्ति करे. वह भी एक-दो महीने के लिए नहीं बल्कि पूरे वित्तीय वर्ष में लगातार यह आपूर्ति की जाती रहे.

सूत्रों की मानें तो इस बाबत किसी भी समय अंतिम फैसला हो सकता है. संभव है कि उसकी घोषणा भी की जाए. हालांकि देश के एक अन्य तेल उत्पादक, ऑयल इंडिया लिमिटेड को इस योजना से दूर रखा जा सकता है. ग़ौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों पेट्रोलियम कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को कच्चे तेल की लगभग 20 फ़ीसदी आपूर्ति ओएनजीसी से होती है. ऐसे में सरकार ने योजना पर अमल किया तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें काफ़ी कम हो सकती हैं.