डेनमार्क की संसद ने गुरुवार को एक विधेयक पारित किया है. इसके तहत देश में एक अगस्त से बुरक़ा और नक़ाब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. संसद ने 75-30 के अंतर से इस कानून काे पारित किया.

ख़बरों के मुताबिक संसद के 74 सदस्यों ने इस विधेयक पर हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया. संसद में यह विधेयक डेनमार्क के सत्ताधारी गठबंधन ने पेश किया था. इस विधेयक पर हुई बहस के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि यह क़दम किसी धर्म-विशेष के ख़िलाफ़ नहीं है. साथ ही बताया कि पगड़ी, साफा और टोपी पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा. इस विधेयक के पारित होते ही डेनमार्क यूरोप के उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां बुरक़े और नक़ाब पर पहले से प्रतिबंध है.

विधेयक में कानून तोड़ने वालों के लिए आर्थिक दंड का प्रावधान भी है. कानून लागू होने के बाद जो लोग उसे तोड़ेंगे उन पर 10,595 रुपए (1,000 डेनमार्क की मुद्रा- क्रोनेर) का ज़ुर्माना लगाया जाएगा. ख़बरों के मुताबिक पहले कानून तोड़ने पर क़ैद की सज़ा का बंदोबस्त भी किया गया था. लेकिन एक सप्ताह तक इस विधेयक पर संसद में चली चर्चा के बाद यह प्रावधान हटा लिया गया. संसद ने विधेयक पारित करते हुए स्पष्ट कहा, ‘बुरक़ा-नक़ाब डेनमार्क की संस्कृति से ताल्लुक़ नहीं रखते.’

ग़ौरतलब है कि यूरोप में सबसे पहले 2011 में फ्रांस ने बुरक़े पर पाबंदी लगाई थी. इसके बाद बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, जर्मनी जैसे कई अन्य देश भी इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं.