देश में इस साल मानसून अपने तय वक्त से पहले ही दस्तक दे चुका है. केरल के साथ दक्षिण भारत के कई अन्य हिस्सों में झमाझम बारिश शुरू हो चुकी है. इस बीच बुधवार को भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मानसून की बारिश को लेकर अपना दूसरा पूर्वानुमान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि बीते चार सालों के मुकाबले उत्तर-पश्चिमी भारत में इस साल ज्यादा बारिश देखने को मिलेगी. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में मानसून सामान्य रहेगा.

द टाइम्स आॅफ इंडिया ने लिखा है कि बीते कुछ सालों के दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत में सामान्य से कम बारिश हुई है. साल 2012 के बाद से सिर्फ 2013 में देश के इस हिस्से में सामान्य से अधिक बारिश हुई थी, लेकिन इसका ज्यादा फायदा नहीं मिल पाया था. उस साल बादल फटने की वजह से उत्तराखंड के कई इलाकों को बाढ़ का सामना भी करना पड़ा था. इसके बाद साल 2014 और 2015 के दौरान तो यहां सूखे जैसी स्थिति बन गई थी.

बताया जाता है कि देश के इस हिस्से में मानसून की मौसमी बारिश में 2014 के दौरान 21 प्रतिशत और 2015 में 17 फीसदी की कमी आई थी. बीते साल देश में मानसून के सामान्य रहने के बावजूद इस हिस्से में 10 फीसदी कम बरसात हुई थी. उधर उत्तर-पश्चिमी भारत की जमीन बेहद उपजाऊ मानी जाती है. ऐसे में अच्छी बारिश न होने का असर फसलों और किसानों पर भी पड़ता है.

उत्तर पश्चिमी भारत में नदियों के पानी के अलावा सिंचाई के अच्छे साधनों के चलते थोड़ी कम बारिश से किसानों को बहुत ज्यादा परेशानी तो नहीं होती, लेकिन यह जरूर है कि इससे खेती पर उन्हें अधिक खर्च करना पड़ता है. साथ ही इसका असर भूमिगत जल स्तर पर भी पड़ता है. इस साल सर्दी के मौसम में भी बारिश सामान्य से कम ही रही थी. ऐसे में इस साल होने वाली मौसम की सामान्य बारिश से इस क्षेत्र के जल स्तर में सुधार की उम्मीद भी की जा रही है.