स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करवाने के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों ने आज से दस दिन का ‘गांव बंद’ आयोजित किया है. एनडीटीवी के मुताबिक किसानों की मांग है कि कर्ज माफी के साथ उन्हें अनाज की कीमत का भुगतान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक किया जाए. साथ ही दूध के लिए उन्हें कम से कम 27 रुपये प्रति लीटर का भुगतान हो और फल व सब्जियों का न्यूनतम मूल्य भी तय किया जाए.

इस दौरान अपनी मांगें मनवाने और विरोध-प्रदर्शन के चलते इन राज्यों के किसानों व डेयरी मालिकों ने दूध, फल, ​सब्जियों के अलावा रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई दूसरी चीजों की आपूर्ति रोक दी है. इसके चलते शहरों की मंडियों में सब्जियों की आवक पर भी असर देखने को मिला है और एक ही दिन के भीतर इनके दामों में बढ़ोतरी हो गई है. वहीं महाराष्ट्र के पुणे में किसानों द्वारा शहरों में आपूर्ति करने के बजाय हजारों लीटर दूध सड़कों पर बहाने की भी खबर है.

इस बीच राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा है, ‘इस विरोध-प्रदर्शन में किसानों के 130 संगठन हमारे साथ हैं. अब यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया है. इस विरोध के दौरान किसान अपना माल लेकर शहरों की तरफ नहीं जाएंगे. इसके अलावा 10 जून को दो बजे तक हम भारत बंद रखेंगे और इस दिन बीते सालों में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी.’

बीते साल मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों ने कर्ज माफी और फसलों के उचित दाम पाने के लिए प्रदर्शन किया था. तब मध्य प्रदेश के मंदसौर में इस प्रदर्शन के हिंसक रूप ले लेने पर स्थानीय पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था और इस दौरान पुलिस की गोलीबारी में छह प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी.