मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस बात की काफी संभावना है कि भारतीय जनता पार्टी अपने पुराने चेहरों को ही आगे कर विधानसभा चुनाव में उतरे. भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर आई है और इस पर भरोसा करें तो कम से कम विधानसभा चुनाव तक तीनों राज्यों के मौज़ूदा मुख्यमंत्रियों- शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह की कुर्सी सुरक्षित रह सकती है.

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है, ‘तीनों ही राज्यों में परिवर्तन का कोई मसला विचाराधीन नहीं हैं. शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह मौज़ूदा मुख्यमंत्री हैं. पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में उनके राज्यों के चुनाव में उतरेगी.’ इन नेताओं का यह भी कहना था, ‘तीनों ही मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों में काफी लोकप्रिय हैं. पार्टी अगर उनको बदलने पर विचार भी करती है तो कम से कम लोकप्रियता के पैमाने पर उनकी बराबरी का कोई विकल्प इन प्रदेशों में उपलब्ध नहीं है.’

इस बाबत आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े प्रकाशन ‘द ऑर्गनाइज़र’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर भी कहते हैं कि चुनाव के ऐन मौके पर इन मुख्यमंत्रियों को बदलने का जोख़िम भाजपा नहीं ले सकती. अलबत्ता सूत्र साथ ही साथ यह ज़रूर जोड़ते हैं कि इस बार यह संभावना काफी है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनाव अभियान की निगरानी सीधे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और उनकी टीम करे. सूत्र बताते हैं कि शाह की टीम ने दोनों राज्यों में अपने ठहरने के लिए ठिकाने ढूंढने की कोशिशें भी शुरू कर दी हैं.

ग़ौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले भाजपाई हैं. वे 2003 से इस पद पर बने हुए हैं. पेशे से डॉक्टर रमन सिंह गैरआदिवासी हैं. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय बहुतायत है. इसी तरह मध्य प्रदेश में शिवराज 13 साल से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं. लेकिन किसान, कर्मचारी सहित कई वर्गों में उनके प्रति नाराज़गी है. उधर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा दो बार इस पद पर रह चुकी हैं. मगर उनकी कार्यशैली से संगठन के कई नेता असंतुष्ट हैं. इन्हीं आधाराें पर इन मुख्यमंत्रियों को बदले जाने की अटकलें लगाई जाती रही हैं. पर इन नेताओं के विकल्प की ग़ैरमौज़ूदगी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती भी है.