बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती उत्तर प्रदेश के कैराना और नूरपुर में हुए उपचुनावों में विपक्ष की जीत के बाद से चुप हैं. उनकी यह चुप्पी सियासी हल्कों में चर्चा का मुद्दा बनी हुई है. बसपा सूत्रों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मायावती रणनीतिक रूप से खामोश हैं. उनके मुताबिक उपचुनावों में मिली सफलता के एवज में वे विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों से उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में कम से कम 40 पर अपने प्रत्याशी खड़ा करने की मांग कर सकती हैं. सूत्रों ने बताया कि पिछले हफ्ते लखनऊ में हुई पार्टी की एक मीटिंग में मायावती ने अपनी योजना कार्यकर्ताओं से साझा की थी. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर अगले लोकसभा चुनाव में बसपा को उचित संख्या में सीटें नहीं मिलीं तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी.

उधर, गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटें व नूरपुर की विधानसभा सीट जीतने के बाद समाजवादी पार्टी इस बात को लेकर उत्सुक नजर नहीं आती कि कौन-सी पार्टी चुनाव में कितनी सीटें चाहती है. मायावती की मांग को लेकर जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से पूछा गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि उनकी पार्टी लोगों का सम्मान करने के लिए जानी जाती है. वहीं, इससे पहले खबर आई थी कि सपा और बसपा अगले लोकसभा चुनाव में राज्य की उन सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करने की सोच रही हैं जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे. इनमें 10 सीटों को लेकर समझौता हो सकता है. इस हिसाब से बसपा के हिस्से में 34 सीटें आ सकती हैं जबकि सपा के पास 31 सीटें रह सकती हैं.

कैराना जैसी एकता बनाए रखने के लिए यह जरूरी होगा कि कांग्रेस और आरएलडी को भी संतोषजनक सीटें दी जाएं. लेकिन मायावती की 40 सीटों की मांग प्रदेश में विपक्षी गठबंधन के लिए संकट बन सकती है. इस पर पार्टी के सूत्रों ने बताया, ‘बसपा कम से कम 50 प्रतिशत सीटों की मांग कर सकती है. पार्टी अपने वोट शेयर और उन सीटों के आधार पर यह मांग करेगी जिन पर पिछली बार वह दूसरे नंबर पर रही थी.’

जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा को कितनी सीटें मिलेंगी, यह इस साल मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी निर्भर करेगा जहां कांग्रेस और बसपा की गठबंधन की योजना है. रिपोर्टों के मुताबिक इससे पहले कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में आठ सीटें दिए जाने की बात हुई थी. दो सीटें वे जहां वह जीती थी,और छह सीटें जहां पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी.