देश के कुछ बड़े निजी अस्पतालों ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत’ (या मोदीकेयर) के तहत सस्ता इलाज देने में असमर्थता जताई है. फोर्टिस, अपोलो, मेदांता और नारायणा हेल्थ जैसे बड़े अस्पतालों ने इस योजना के तहत तय इलाज की कुछ प्रक्रियाओं की कीमतों पर आपत्ति जाहिर की है. उनका कहना है कि इतनी कम कीमत पर इलाज करना संभव नहीं है.

सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि शुक्रवार को इस मामले में निजी अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों ने नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात भी की. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर (इंडिया) की तरफ से नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदु भूषण को एक पत्र दिया गया. खबर के मुताबिक इस पत्र में कहा गया है, ‘ऐसा लगता है कि (इलाज की) कीमतें तय करने में कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं अपनाया गया. आपको समझना होगा कि जब तक इलाज की मूल्य दरें उचित रूप से नहीं बढ़ाई जातीं तब तक निजी अस्पताल अच्छा इलाज नहीं दे सकते.’

हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि उसने कीमतें सोच-समझकर तय की हैं. अस्पतालों के अधिकारियों से इंदु भूषण ने कहा, ‘कीमतें राष्ट्रीय स्तर पर तय की हैं. हमने इन्हें लचीला रखते हुए इतनी गुंजाइश भी छोड़ी है कि राज्य सरकारें इनमें 10 फीसदी तक का बदलव कर सकें.’ उनके मुताबिक इसके साथ ही निजी अस्पतालों के लिए 30 फीसदी तक इंसेटिव यानी प्रोत्साहन उपाय भी हैं.

नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल का कहना है कि मोदीकेयर योजना का मकसद है दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में गुणवत्तापूर्ण इलाज मुहैया कराना. उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल काफी ज्यादा मुनाफा कमाते हैं इसलिए वे इलाज की कीमतें कम कर सकते हैं.

हालांकि निजी अस्पताल इस बात से सहमत नहीं हैं. नारायणा हेल्थ अस्पताल के चेयरमैन डॉ देवी शेट्टी ने कहा, ‘अच्छा इलाज देने के लिए हमें और पैसा खर्च करना होगा. कुछ दरें तो काफी कम हैं और हमने सरकार से इस बारे में बात की है. उम्मीद है कि कीमतों में बदलाव किया जाएगा.’ वहीं, मेदांता अस्पताल के डॉ नरेश त्रेहन का कहना है कि सरकार को इस मामले में एक स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त करनी चाहिए ताकि इलाज की कीमतें तय की जा सकें.

मोदीकेयर क्या है?

आयुष्मान भारत योजना या मोदीकेयर भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना है. इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (बीपीएल धारक) को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है. योजना के तहत आने वाले हरेक परिवार को सालाना पांच लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा. रिपोर्टों के मुताबिक 10 करोड़ बीपीएल धारक इस योजना का सीधा लाभ उठा सकेंगे.