केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आख़िरकार कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) का गठन कर ही दिया. उच्चतम न्यायालय ने इस साल 16 फरवरी को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह छह सप्ताह के भीतर सीडब्ल्यूएमए का गठन करे. लेकिन कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के कारण सरकार अब तक इसका गठन टाल रही थी.

बहरहाल अब सरकार की ओर से इस प्राधिकरण के गठन के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है. इसके मुताबिक प्राधिकरण में एक अध्यक्ष, आठ सदस्य और एक सचिव होंगे. अध्यक्ष के तौर पर किसी जाने-माने वरिष्ठ इंजीनियर की नियुक्ति की जाएगी. उन्हें जलसंसाधन प्रबंधन और अंतरराज्यीय जल विवाद के निपटारे का अनुभव भी होना चाहिए. ऐसे इंजीनियर के न मिलने पर इन्हीं पात्रताओं के साथ किसी आईएएस को भी प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. अध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल का होगा और उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 साल होगी.

इसके अलावा प्राधिकरण में आठ सदस्य होंगे. इनमें दो-दो पूर्णकालिक और अंशकालिक सदस्य होंगे. बाकी चार अंशकालिक सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि होंगे. अब यह प्राधिकरण और इसके तहत बनाई गई कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ही नदी के पानी के बंटवारे के मसले पर विवाद का निपटारा करेगी. साथ ही इस बाबत उच्चतम न्यायालय और कावेरी जल विवाद प्राधिकरण के आदेश लागू करेगी. बताते चलें कि कावेरी नदी के पानी के बंटवारे का मसला तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुड्‌डुचेरी के बीच लंबे समय से उलझा हुआ है.