चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट विपक्ष को मिल रही सफलता को देखते हुए अब उसके खिलाफ एक और गठबंधन आकार लेने लगा है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने आगामी लोक सभा चुनाव के लिए दिल्ली में गठबंधन करने की बातचीत शुरू कर दी है. सूत्रों का कहना है कि इस बारे में दोनों दलों के बीच 24 मई को अनौपचारिक बातचीत हुई, जिसमें कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश और अजय माकन शामिल हुए. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इसके लिए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की इजाजत है या नहीं.

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी 2015 में बिहार के महागठबंधन और कर्नाटक में कांग्रेस व जेडीएस के हालिया गठजोड़ की तर्ज पर दिल्ली में गठबंधन करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. नाम न जाहिर करने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि इस संभावित गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी ने ही कांग्रेस से संपर्क साधा था और उसे लोक सभा की सात में से दो सीटें देने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन कांग्रेस तीन सीटें मांग रही है. इसमें नई दिल्ली सीट शर्मिष्ठा मुखर्जी, चांदनी चौक सीट अजय माकन और उत्तर पश्चिम सीट राजकुमार चौहान के लिए है. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर जारी बातचीत सीटों के बंटवारे पर अटक सकती है, क्योंकि आम आदमी पार्टी कांग्रेस को फिलहाल दो से ज्यादा सीटें देने पर राजी नहीं है.

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन की अटकलों को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक ट्वीट से भी बल मिला है. गुरुवार को भारत में विदेशी निवेश की अनिश्चितता से जुड़ी एक खबर साझा करते हुए उन्होंने लिखा था, ‘जनता मनमोहन सिंह जैसे पढ़े-लिखे नेता की कमी महसूस कर रही है. जनता को समझ में आ गया है – पीएम तो पढ़ा-लिखा ही होना चाहिए.’ अरविंद केजरीवाल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कट्टर आलोचकों में गिने जाते हैं. जैसा कि 2013 में उन्होंने कहा था, ‘मनमोहन सिंह अपनी सरकार और कांग्रेस के भीतर भ्रष्टाचार रोकने में विफल रहे हैं.’ हालांकि, उनकी पार्टी की ओर से कांग्रेस के साथ गठबंधन की यह पहल बताती है कि भाजपा का अपराजेय विस्तार दो धुर विरोधी दलों को दोस्त बनने के लिए मजबूर कर रहा है.