विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा मिसाइलें तैनात करने को लेकर अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने सख्त चेतावनी दी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सिंगापुर में आयोजित सालाना शांगरी ला डायलॉग में शनिवार को उन्होंने कहा, ‘दक्षिण चीन सागर में चीन की नीति उस खुलेपन के खिलाफ है जिसे हमारी रणनीति प्रोत्साहित करती है, यह चीन के व्यापक लक्ष्यों पर भी सवाल खड़े करती है.’ जिम मैटिस ने आगे कहा कि चीन के दावों के विपरीत दक्षिण चीन सागर में हथियारों की तैनाती धमकी और जबरदस्ती के मकसद से सीधे सैन्य कार्रवाई से जुड़ी है.

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने दक्षिणी चीन सागर के सैन्यीकरण के बुरे परिणामों को लेकर भी चेताया है. उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी देशों का भरोसा टूटा तो भविष्य में इसके बहुत व्यापक परिणाम होंगे. जिम मैटिस का यह भी कहना था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन चीन के साथ सृजनात्मक और परिणामोन्मुख रिश्तों पर काम करना चाहता है लेकिन जरूरत पड़ी तो उसके साथ ‘मुकाबला’ भी करेगा.

चीन ने दक्षिण चीन सागर में स्पार्टली द्वीप के इलाके में एंटीशिप मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक जैमर तैनात किये हैं. बीते महीने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने इसके पुख्ता सबूत होने का दावा करते हुए इन्हें हटाने की मांग की थी. इसके अलावा इस पर विरोध जताते हुए अमेरिका ने मई में प्रशांत महासागर में आयोजित सालाना सैन्य अभ्यास में चीन को आमंत्रित भी नहीं किया था.

अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने यह भी कहा है कि पेंटागन ताइवान को आत्मरक्षा से जुडे साजोसामान और सेवाएं उपलब्ध कराता रहेगा. उनके इस बयान से चीन के खफा होने की आशंका जताई जा रही है. ताइवान में आजादी की समर्थक साई इंग वेन के राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन की उसको लेकर शत्रुता काफी बढ़ गई है.