असम में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के 90 फीसदी कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने संगठनों से इस्तीफा दे दिया है. स्थानीय वेबसाइट गुवाहाटी प्लस के मुताबिक बजरंग दल छोड़ चुके गुवाहाटी के पूर्व जिला संयोजक दीपज्योति शर्मा ने कहा, ‘गुवाहाटी में संगठन के 820 में से 816 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है.’ उन्होंने बताया कि राज्य में बजरंग दल के 14 हजार सक्रिय सदस्यों में से 13,900 इस्तीफा दे चुके हैं. वहीं, विहिप सदस्यों के बारे में उन्होंने कहा कि गुवाहाटी में उसके 400 सक्रिय सदस्यों में से 380 इस्तीफे दे चुके हैं. इसमें विहिप के राज्य सलाहकार टीके शर्मा सहित शीर्ष नेता भी शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक बजरंग दल और विहिप में यह दरार प्रवीण तोगड़िया के अलग होने के बाद आई है. इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ता इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (समर्थित) को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. उनका कहना है कि आरएसएस के विद्रोह की वजह से प्रवीण तोगड़िया के करीबी राघव रेड्डी को विहिप के अध्यक्ष पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. विहिप के पूर्व सदस्यों के मुताबिक प्रवीण तोगड़िया छह साल तक संगठन के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राघव रेड्डी अध्यक्ष रहे, इन्हीं की मेहनत की वजह से भाजपा को राज्य और केंद्र में सत्ता मिली है.

बीते दिनों प्रवीण तोगड़िया ने न केवल मोदी सरकार की आलोचना की थी, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सीधा हमला बोला था. दीपज्योति शर्मा के मुताबिक प्रवीण तोगड़िया 2014 से पहले किए गए वादों पर केंद्र सरकार के यू-टर्न से नाराज थे. इनमें राम मंदिर निर्माण, बेरोजगारी और भुखमरी जैसे मुद्दे शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संगठन छोड़ने वाले सभी सदस्य 2019 के आम चुनाव में भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक प्रवीण तोगड़िया 24 जून को नया हिंदू संगठन गठित करने के बाद एक जुलाई को असम जाएंगे.