परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक होने इी घटनाएं बीते कुछ समय से लगातार सामने आ रही हैं. इन्हें रोकने की तमाम कोशिशें अब तक कोई ख़ास असर नहीं दिखा पाई हैं. लिहाज़ा अब सूत्रों की मानें तो सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल) ने ऐसे इंतज़ाम करने की तैयारी की है जिससे पेपर लीक होने की ज़्यादा गुंज़ाइश ही न रहे.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सीबीएसई के लिए पेपर लीक रोकना एक बड़ी चुनौती है. इसकी वज़ह ये है कि वह कक्षा 12वीं के लिए 168 कोर्स संचालित करता है. जबकि कक्षा 10वीं के लिए 70 के क़रीब. यही नहीं छात्र-छात्राओं के लिए यह भी कोई पाबंदी नहीं है कि वे कौन से विषय का विकल्प चुनें और किसका नहीं. इसलिए स्थिति कुछ और जटिल हो जाती है. इसी कारण से सीबीएसई को परीक्षाएं संचालित करने में भी वक़्त ज़्यादा लगता है.

सूत्रों के मुताबिक परीक्षाओं में लगने वाले इसी अधिक समय अक़्सर फ़ायदा उठा लिया जाता है. लिहाज़ा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से पेपर लीक के इस मसले पर विचार के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति समिति ने इसी समय को कम करने की सिफ़ारिश कर सकती है. समिति के एक सदस्य बताते हैं, ‘अभी परीक्षाओं के संचालन में सीबीएसई को सात सप्ताह लग जाते हैं. हम इसे चार-पांच सप्ताह तक लाने की तैयारी में हैं.’

नाम न छापने की शर्त पर वे बताते हैं, ‘प्रश्न पत्रों की दोहरी गोपनीयता (एनक्रिप्शन) के अलावा यह कोशिश की भी की जा रही है कि उनकी छपाई परीक्षा केंद्रों पर ही हो. इसके साथ प्रश्न पत्रों पर वॉटर मार्क भी लगाए जा सकते हैं. जिससे उनके लीक होने की स्थिति में यह पता करने में आसानी होगी कि वे किस परीक्षा केंद्र से लीक हुए हैं. विषयों का समूह बनाकर उनमें से कुछ को चुनने का विकल्प भी छात्र-छात्राओं को दिया जा सकता है.’