अफगानिस्तान में रमजान के पवित्र महीने में भी आत्मघाती हमले जारी हैं. सोमवार को आतंकियों ने काबुल में मौलवियों के शांति सम्मेलन को निशाना बनाकर आत्मघाती धमाका किया. टोलो न्यूज के मुताबिक इसमें सात मौलिवियों और चार सुरक्षाकर्मियों सहित 14 लोगों की मौत हो गई. तीन मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है. इस हमले में 17 लोग घायल हुए हैं. तालिबान ने इस हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया है. वहीं, किसी दूसरे आतंकी संगठन ने भी अभी तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है.

रिपोर्ट के मुताबिक काबुल पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के नजदीक लोया जिरगा (महा सभा) टेंट में आयोजित कार्यक्रम में 2,000 से ज्यादा मौलवी शामिल थे. काबुल पुलिस के प्रवक्ता हशमत स्टैनिकजई ने कहा कि यह आत्मघाती धमाका उस वक्त हुआ जब लोग कार्यक्रम से बाहर जा रहे थे. पुलिस प्रवक्ता ने शुरुआत में सात की मौत और नौ लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी.

सोमवार को ही मौलवियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक फतवा जारी किया था. इसमें कहा गया था, ‘शरिया और इस्लामिक कानूनों के मुताबिक सभी तरह की लड़ाइयां नाजायज हैं. यह मुस्लिमों का खून बहाने के अलावा और कुछ भी नहीं है.’ मौलवियों ने यह भी कहा था कि आत्मघाती हमला, लोगों को मारने के लिए विस्फोट करना, विभाजन, उपद्रव, भ्रष्टाचार, लूट और डकैती इस्लाम में सबसे बड़े पाप हैं और अल्लाह के आदेश के खिलाफ हैं. धर्म गुरुओं ने तालिबान से अफगान सरकार के शांति प्रस्ताव को भी स्वीकार करने की अपील की थी.

तालिबान ने देश पर नियंत्रण कायम करने और सख्त इस्लामिक शासन को लागू करने के मकसद से आक्रामक लड़ाई छेड़ रखी है. बीते कुछ महीनों में अफगानिस्तान, खास तौर पर राजधानी काबुल में हुए आतंकी हमलों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. इनमें से कुछ हमलों की जिम्मेदारी तालिबान ने, जबकि कुछ की इस्लामिक स्टेट ने ली थी.