पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर लगातार मुहिम चल रही है. इसी के तहत यहां एक तस्वीर खूब शेयर की जा रही है. इसमें बड़ी संख्या में कारें सड़क पर खड़ी दिखाई दे रही हैं और ड्राइवर सहित कारों की सवारियां सड़क पर हैं. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर जर्मनी की है जहां सरकार ने जब पेट्रोल के दाम बढ़ाए तो वहां के लोगों ने विरोध करने के लिए यह तरीक़ा अपनाया. उन्होंने अपनी गाड़ियां सड़क पर ही छोड़ ही दीं. हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में वायरल हुई इस पोस्ट को लाखों लोगों ने लाइक और शेयर किया है.

कई जगह इस तस्वीर को शेयर करते हुए कहा गया है, ‘जर्मनी में जब सरकार ने पेट्रोल के दाम बढ़ाए तो एक घंटे के अंदर सभी अपनी कारों को सड़क पर छोड़कर घर चले गए. दस लाख से ज़्यादा कारें सड़क पर खड़ी देखकर सरकार को दाम घटाने पड़े. यदि लोग समझदारी से काम लें तो कोई भी सरकार उन्हें बेवक़ूफ़ नहीं बना सकती.’

यहां ‘समझदारी’ से मतलब पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों को लेकर सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने से है. लेकिन ऐसा इस तस्वीर के पीछे की कहानी पर यक़ीन करके नहीं किया जाना चाहिए. क्योंकि न तो इस तस्वीर का तेल की बढ़ती क़ीमतों से कोई संबध है और न ही यह तस्वीर जर्मनी की है.

दरअसल यह अक्टूबर, 2012 के दौरान चीन में खींची गई एक तस्वीर है. उस समय वहां आठ दिन का नेशनल हॉली-डे चल रहा था और लोग छुट्टियां मनाने यहां-वहां जा रहे थे. तब इन्हीं दिनों सरकार ने कुछ समय के लिए देश की सभी सड़कों को टोल-फ्री भी कर दिया और इसका नतीजा यह हुआ कि चीन की तमाम सड़कों पर एक साथ क्षमता से ज्यादा वाहन आ गए और यहां ऐतिहासिक जाम की स्थिति बन गई. ब्रिटिश अख़बार टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस जाम की चपेट में चीन के 16 प्रांत आए थे. उस समय इस जाम से जुड़ीं ख़बरें और तस्वीरें पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई थीं.

टेलीग्राफ
टेलीग्राफ

यह पहला मौक़ा नहीं है जब इन तस्वीरों को तेल के बढ़ते दामों से जोड़कर दिखाया जा रहा हो. और ऐसा भी नहीं है कि इसके ज़रिये ग़लत जानकारी केवल भारत में फैलाई गई हो. यह तस्वीर जर्मनी, चीन, दक्षिण अफ़्रीका व अन्य देशों में भी पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का ज़रिया बनती रही है. चलते-चलते बता दें कि साल 2008 में जब जर्मनी में पेट्रोल की क़ीमत 2.30 डॉलर प्रति लीटर हो गई थी तो लोगों का विरोध देखने को मिला था और तब देश में आम तौर-तरीकों से ही प्रदर्शन हुए थे. हालांकि इस समय वहां एक लीटर पेट्रोल की क़ीमत 1.70 डॉलर है. यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से जर्मनी के लोग प्रति लीटर पेट्रोल के लिए 114 रुपये से ज़्यादा की क़ीमत चुका रहे हैं.