‘अगर यह कहूं कि उपचुनावों में हार से भाजपा को चोट नहीं पहुंची है तो गलत होगा.’

— मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का यह बयान हालिया लोक सभा और विधानसभा उपचुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन को लेकर आया. विपक्ष की एकता के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘आप युद्ध के मैदान में होते हैं और विरोधियों की रणनीतियों को समझ लेते हैं, तब मुकाबला आसान हो जाता है. अब हमारे पास (उपचुनाव का) अनुभव है, जिससे हमें (अगले चुनाव में) आसानी होगी.’ क्षेत्रीय दलों के भाजपा से अलग होने पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘हम संघीय व्यवस्था में यकीन करते हैं, इसलिए हम चाहेंगे कि हमारे सहयोगी हमारे साथ बने रहें.’ केंद्रीय मंत्री के मुताबिक जरूरत पड़ी तो भाजपा नए सहयोगियों को भी जोड़ाेगी.

‘बिहार में 2019 में एनडीए को प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के नाम और नीतीश के काम पर वोट मिलेगा.’

— सुशील कुमार मोदी, बिहार के उपमुख्यमंत्री

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का यह बयान 2019 के आम चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए का चेहरा बनाए जाने के सवाल पर आया. उन्होंने कहा, ‘देश के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और बिहार के नेता नीतीश कुमार...इसमें विरोधाभास कहां है.’ जदयू के साथ सीटों के बंटवारे के बारे में सुशील कुमार मोदी ने कहा, ‘कोई विवाद ही नहीं है, जब दिल मिल गए तो सीटें कौन सी बड़ी चीज हैं.’ उपमुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि चुनाव में कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा या नहीं लड़ेगा, एक दिन की बैठक के बाद इसका ऐलान हो जाएगा.


‘केशव प्रसाद मौर्य को मुख्यमंत्री न बनाने से ओबीसी मतदाता भाजपा से नाराज हो गए हैं, यह तल्ख हकीकत है.’

— ओम प्रकाश राजभर, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर का यह बयान उपचुनावों में भाजपा को की हार की वजहों पर चर्चा करते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘2017 के विधानसभा चुनाव में ओबीसी ने बड़ी संख्या में भाजपा को वोट दिया था. लोगों में चर्चा थी कि केशव प्रसाद मौर्य को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.’ ओम प्रकाश राजभर ने आगे कहा कि सरकार अगर गन्ना किसानों को भुगतान नहीं दिला सकी तो यह चिंता की बात है. उन्होंने यह भी कहा, ‘अगर हम सत्ता में हैं और विफल रहते हैं तो यह किसकी जिम्मेदारी होगी? विपक्ष की?’ ओम प्रकाश राजभर इससे पहले भी भाजपा को मुश्किल में डालने वाले बयान दे चुके हैं.


‘कर्नाटक और तमिलनाडु को कावेरी जल विवाद सुलझाना होगा, दूसरा कोई रास्ता नहीं है.’

— कमल हासन, अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम के प्रमुख

अभिनेता कमल हासन का यह बयान कावेरी नदी जल विवाद के मुद्दे पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से मिलने के बाद आया. उन्होंने कहा, ‘कर्नाटक और तमिलनाडु को आपस में बात करके यह विवाद सुलझाना चाहिए, क्योंकि दोनों राज्यों के किसान महत्वपूर्ण हैं.’ रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ पर कर्नाटक में रोक लगाए जाने पर कमल हासन ने कहा कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से यह मुलाकात फिल्म को लेकर नहीं थी, कावेरी जल विवाद इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है. उधर, अभिनेता प्रकाश राज ने कहा है कि फिल्म या कला को निशाना बनाना सबसे आसान होता है, किसी फिल्म का विरोध किया जा सकता है लेकिन उसे रोका नहीं जा सकता. उनके मुताबिक जब समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो अराजक तत्व कानून हाथ में लेने लगते हैं.


‘तेल कीमतों को रोजाना तय करने की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.’

— धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान पेट्रोल और डीजल की कीमतों को रोजाना तय करने की व्यवस्था को बदलने की मांग पर आया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित है और इसके दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम कर रही है. धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा कि राज्य सरकारों को पेट्रोल और डीजल पर करों को तार्किक और जवाबदेह बनाना चाहिए और कीमतें बढ़ाकर अकूत कमाई नहीं करनी चाहिए. रूस से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की पहली खेप आने पर केंद्रीय मंत्री का कहना था कि यह भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बड़ी उपलब्धि है.


‘ईरान दुश्मनों के किसी भी हमले का दस गुना ताकत से जवाब देगा.’

— अयातुल्लाह अली खामनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई का यह बयान विरोधी देशों पर निशाना साधते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘हमारे दुश्मन इस क्षेत्र में आजाद ईरान नहीं चाहते. उन्होंने हमारे खिलाफ आर्थिक और मनोवैज्ञानिक जंग छेड़ रखी है, हालिया अमेरिकी पाबंदी इसी का हिस्सा है.’ अयातुल्लाह अली खामनेई ने आगे कहा कि ईरान कमजोर देशों की मदद करता रहेगा. अमेरिकी दबाव के खिलाफ अरब के युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आपको अपने भविष्य को अपने हाथ में लेने के लिए पहल करनी चाहिए, क्योंकि कुछ देश अपने नागरिकों के दुश्मन की तरह काम करते हैं.