फेसबुक एक बार फिर अपने यूजर्स की निजी जानकारियों को लेकर चर्चा में है. खबर है कि दुनिया की इस सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी ने दूसरी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ समझौते कर उनसे यूजर्स की निजी जानकारियां शेयर की हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि बीते दशक में फेसबुक ने कम से कम 60 कंपनियों से समझौते कर उनसे डेटा शेयर किया है. इनमें एपल, एमजॉन, ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग जैसी कंपनियां शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि स्मार्टफोन एप के जरिये हर व्यक्ति तक पहुंचने से पहले फेसबुक ने यूजर्स की जानकारियां दूसरी कंपनियों से शेयर की थीं. खबरों के मुताबिक इन समझौतों से फेसबुक को अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिली और फोन बनाने वाली कंपनियों को सोशल नेटवर्किंग में ग्राहकों की पसंद के फीचर जानने का मौका मिला.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक फेसबुक ने कंपनियों को यूजर्स के फेसबुक फ्रेंड्स तक का डेटा उनकी सहमति के बिना लेने की अनुमति दे रखी थी. वह भी तब जब उसने यह घोषित किया हुआ है कि दूसरी कंपनियों से अब डेटा शेयर नहीं किया जाएगा. कैंब्रिज एनालिटिका का मामला सामने आने के बाद बीते अप्रैल में फेसबुक ने इन समझौतों को समेटने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हालांकि इनमें कई अभी भी बने हुए हैं.

फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कैंब्रिज ने 2014 में डेटा का गलत इस्तेमाल किया था. लेकिन बाद में फेसबुक ने मोबाइल एप डेवलपर्स को डेटा इकट्ठा करने से रोक दिया था जिसके बाद अगले साल कैंब्रिज एनालिटिका डेटा का इस्तेमाल नहीं कर पाई. लेकिन फेसबुक के अधिकारियों ने यह बात नहीं बताई कि कंपनी ने सेलफोन, टैबलेट और अन्य हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों को यूजर्स का डेटा इस्तेमाल करने की छूट दे रखी है.

उधर, फेसबुक के अधिकारियों ने दूसरी कंपनियों के साथ डेटा शेयर किए जाने को लेकर कंपनी का बचाव किया है. उन्होंने कहा है कि समझौतों के तहत कंपनियों को डेटा का सीमित इस्तेमाल करने की इजाजत थी. उनका दावा था कि ऐसा कोई मामला नहीं था जिसमें डेटा का गलत इस्तेमाल किया गया हो. डेटा शेयरिंग को लेकर उनका तर्क है कि इसके जरिये फोन बनाने वाली कंपनियां फेसबुक का विस्तार करती हैं.