देश के गन्ना किसानों को मुश्किलों से उबारने के लिए केंद्र सरकार ने राहत पैकेज देने की तैयारी कर ली है. सरकार के सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि चीनी क्षेत्र पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और चीनी मिलों पर गन्ना किसानों की बकाया राशि चुकाने के लिए 8,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा होने वाली है.

यह पैकेज दो तरह से खर्च किया जाएगा. पहला, सरकार 30 लाख मीट्रिक टन चीनी का बफर स्टॉक बनाएगी. यह चीनी मिलों के गोदामों में रखी जाएगी. इस भंडारण की कीमत सरकार चुकाएगी. इसके लिए 1,200 करोड़ रुपये का इंतजाम किया जाएगा. खबर के मुताबिक इससे मिलों के पास नकदी बढ़ेगी और वे किसानों को भुगतान कर पाएंगी.

दूसरा, सरकार चाहती है कि देश में इथेनॉल के उत्पादन में बढ़ोतरी हो. यह गन्ने से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है जिसे ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार 4,400 करोड़ रुपये की योजना शुरू कर सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक इससे अधिक पैदावार वाले सीजन में गन्ना यूं ही पड़ा नहीं रहेगा और इसे इथेनॉल उत्पादन में लगातर किसान को तुरंत भुगतान किया जा सकेगा.

इसके अलावा सरकार चीनी की बिक्री की न्यूनतम कीमत 29 रुपये प्रति किलो करने पर विचार कर रही है. इस योजना के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि चीनी मिलें एक निश्चित मात्रा से ज्यादा चीनी न बेच सकें. सूत्रों का कहना है कि कीमत तय करने और 30 लाख मीट्रिक टन वाले बफर स्टॉक की मदद से बाजार में चीनी की आपूर्ति नियमित होगी और इसके दाम नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

उधर, सरकार के इस फैसले को कैराना उपचुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है जहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है. किसान संघर्ष समिति ने कहा है कि गन्ना किसानों के लिए नई योजनाएं चुनावी हार का नतीजा हैं. बता दें कि हाल में उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था. इस इलाके में गन्ना किसान भारी संख्या में है जो चीनों मिलों पर उनके बकाए से काफी नाराज थे. बताया जाता है कि उनकी यही नाराजगी भाजपा को भारी पड़ी.