ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर के ख़जाने की चाबी गुम है. मामला अप्रैल के शुरू में हुई प्रबंधन समिति की बैठक में सामने आया था. तब से ही इस मामले में लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई थी. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने न्यायिक जांच का आदेश जारी कर दिया.

सरकारी आदेश के मुताबिक, ‘ओडिशा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मामले की जांच करेंगे. वे पता लगाएंगे के मंदिर के रत्न भंडार की चाबी किन परिस्थितियों में गुम हुई. अगले तीन महीने में वे जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे.’ मुख्यमंत्री ने राज्य के कानून मंत्री प्रताप जेना और जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक पीके जेना से विचार-विमर्श के बाद यह फैसला किया है.

ग़ौरतलब है कि 12वीं शताब्दी में बने पुरी के जगन्नाथ मंदिर को ओडिशा का सबसे धनाढ्य मंदिर माना जाता है. देश के चुनिंदा धन-संपन्न मंदिरों में भी इसे शुमार किया जाता है. अभी 22 मार्च को ही उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए 16 सदस्यों की टीम बनाकर मंदिर के रत्न भंडार की जांच का आदेश दिया था. इस टीम ने जांच भी की लेकिन सिर्फ बाहरी हिस्से की.

बताया जाता है कि मंदिर प्रशासन ने जांच टीम को रत्न भंडार की जो चाबियां दी थीं उनमें अंदरूनी हिस्से की चाबी थी ही नहीं. जानकारी यह भी सामने आई कि रत्न भंडार का निरीक्षण आख़िरी बार 1984 में हुआ था. लेकिन उस समय भी सात तिजोरियों में से सिर्फ तीन को खोला गया था. उनमें भी कितना ख़जाना है, उसका ऑडिट नहीं हुआ. हालांकि तब से एक व्यस्था ज़रूर बना दी गई.

व्यवस्था ये थी कि रत्न भंडार की चाबियां हर बार इस्तेमाल के बाद जिला कलेक्टर को सौंपी जाएंगी. कलेक्टर इन चाबियों को जिले के सरकारी कोषागार में जमा कराएंगे. हालांकि अब यह भी सामने आया है कि ये चाबियां कब-कब कलेक्टर को सौंपी गईं, उन्होंने इन्हें सरकार कोषागार में जमा कराया या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है. इससे पूरे मामले पर संदेह और ज़्यादा गहरा गया है.