गोवा और दमन के आर्चबिशप फादर फिलिप नेरी फेराओ ने चर्चों के साथ ईसाइयों से भी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की अपील की है. इसके लिए उन्होंने बाकायदा एक पत्र भी लिखा है. खबरों के मुताबिक इलाके के तमाम चर्चों को भेजे गए इस पत्र में फिलिप नेरी फेराओ ने लिखा है, ‘आज भारत का संविधान खतरे में है. इसकी वजह से अधिकांश लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. ऐसे में अगले आम चुनाव में ईसाई समुदाय को इसकी रक्षा के लिए प्रयास करना होगा.’

फेराओ आगे लिखते हैं, ‘आज मानवाधिकारों का हनन हो रहा है. खान-पान और रहन-सहन के तौर तरीकों में एकरूपता लागू कराने की कोशिश की जा रही है. यह धार्मिक आजादी छीनने और एक जैसी संस्कृति व परंपरा थोपे जाने की कोशिश करने जैसा है.’ बताया गया है कि उन्होंने यह पत्र पादरी नववर्ष (पेस्टोरल ईयर) शुरू होने के मौके पर भेजा है. पादरी वर्ष की शुरुआत एक जून से होती है.

इससे पहले बीते महीने दिल्ली के आर्चबिशप अनिल काउटो ने भी एक पत्र लिख कर भारत के राजनीतिक माहौल को अशांत बताया था. साथ ही उन्होंने भी आगामी आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने समुदाय से प्रार्थना अभियान चलाने की बात कही थी. हालांकि उनके इस बयान पर राजनीति गर्मा गई थी. भाजपा ने इसकी कड़ी आलोचना की थी. तब केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत में अल्पसंख्यक पूरी तरह सुरक्षित हैं और देश में जाति व पंथ के आधार पर कोई अंतर नहीं किया जाता है.