रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सेना के खिलाफ उकसावे का मुकम्मल जवाब दिए जाने की बात दोहराई है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार जम्मू-कश्मीर में रमजान के दौरान सीजफायर के फैसले पर उन्होंने कहा, ‘इसकी सफलता या असफलता का आकलन करने में रक्षा मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है. हमारा काम सीमाओं की सुरक्षा करना है. अगर हमें उकसाया गया तो हम भी नहीं रुकेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि सेना सीजफायर का सम्मान करती है लेकिन उसे बगैर उकसावे के होने वाले हमलों का जवाब देने की छूट मिली हुई है. उनके मुताबिक जब भी ऐसे हमले होते हैं, सेना उनका मुकम्मल जवाब देती है. रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सेना को सतर्क रहना होगा ताकि वह बगैर उकसावे के होने वाले हमलों का जवाब दे सके.

मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने मंत्रालय की उपलब्धियों की जानकारी देने वाली ई बुक भी जारी की. इस मौके पर पाकिस्तान के साथ बातचीत के सवाल पर उन्होंने कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं. रक्षा मंत्री ने राफेल विमान सौदे में घोटाले के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया और सेना के पास जरूरी साजोसामान की कमी से इनकार किया. रक्षा मंत्री ने आगे कहा, ‘सेना को यूपीए सरकार के समय पैसे की कमी हुई थी, अब ऐसी कोई कमी नहीं है.’

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने छावनियों की सड़कों को खोले जाने के आदेश पर भी सफाई दी. द एशियन एज के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय ने केवल उन्हीं जगहों पर सड़कों को खोलने का आदेश दिया है, जहां सैनिक और आम आबादी साथ-साथ रहती है. यह आदेश सैन्य ठिकानों पर लागू नहीं है.’ रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि 52 छावनियों में 850 सड़कों को बंद किया गया, जिनमें से 119 सड़कों को तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर बंद कर दिया गया था. उनके मुताबिक इन्हीं 119 सड़कों में से 80 को खोला गया है.