भारत दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता हे. लेकिन इस क्षेत्र के एक अहम देश मालदीव से भारत को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है बल्कि विपरीत प्रतिक्रिया ही हाथ लग रही है. इस सिलसिले में अभी ख़बर आई है कि मालदीव सरकार भारत को वह नौसैनिक हेलीकॉप्टर वापस लौटा रही है जो उसे उपहार में मिले थे.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मालदीव की अब्दुल्ला यमीन सरकार ने भारत को पत्र लिखकर कहा है कि वह लामू प्रायद्वीप में तैनात अपना हेलीकॉप्टर (एएलएच ध्रुव) वापस बुला ले. इस हेलीकॉप्टर से संबंधित लैटर ऑफ एक्सचेंज (एलओई- विनिमय पत्र) की अवधि पिछले महीने ख़त्म हो चुकी है. यमीन सरकार ने इस अवधि को बढ़ाने से तो इंकार किया ही है साथ ही इसे हटाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जून के अंत तक की समय सीमा भी तय कर दी है.

ग़ौरतलब है कि भारत ने कुछ समय पहले मालदीव को दो एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर उपहार में दिए थे. इनमें से एक अन्य हेलीकॉप्टर अद्दू प्रायद्वीप में तैनात है. इसे भी वापस लेने के लिए मालदीव पहले ही भारत से कह चुका है. बताया जाता है कि मालदीव इससे ख़ास तौर पर नाराज़ है कि इन हेलीकॉप्टरों के साथ भरतीय नौसेना के जवान भी उसके द्वीपों पर तैनात किए गए हैं. भारत ने इन हेलीकॉप्टरों के संचालन, रखरखाव और इनके बारे में मालदीव के सैनिकों की मदद के लिए छह पायलट और 12 से अधिक ज़मीनी स्टाफ वहां तैनात कर रखा है.

यही नहीं भारत इस वक़्त मालदीव में पुलिस अकादमी भी बना रहा है. लेकिन सूत्र बताते हैं कि यमीन सरकार ने इसके निर्माण कार्य के लिए आने वाले भारतीयों को ‘कामकाजी परमिट’ जारी करने पर भी रोक लगा दी है. इससे यह परियोजना भी बाधित है. ग़ौरतलब है कि लामू प्रायद्वीप काफी रणनीतिक महत्व रखता है. इसीलिए भारत और चीन दोनों ही यहां अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहते हैं. यही वजह है कि इस साल के शुरूआत में चीन ने भी मालदीव में एक बंदरगाह के निर्माण में रुचि दिखाई थी. मालदीव सरकार के ताज़ा रुख़ को इससे भी जोड़ा जा रहा है.