सात ग्रैंड स्लैम जीत चुके और अपना 12वां ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल खेल रहे सर्बिया के नोवाक जोकोविच का अभियान फ्रेंच ओपन में मंगलवार रात थम गया. रोलां गैरो की लाल बजरी वाले शानदार कोर्ट पर जैसे ही इटली के मार्को सेच्चिनाटो का बैकहैंड रिटर्न जोकोविच की पहुंच से बाहर हुआ, इतिहास का एक पल चुपचाप सेच्चिनाटो के रैकेट पर आकर ठहर गया. फ्रेंच ओपन के इतिहास में इस उलटफेर का जो भी मतलब हो, लेकिन मार्को की जिंदगी के लिए यह एक स्वप्न जैसा था जो अब हकीकत में बदल चुका था. आज से दो साल पहले मैच फिक्सिंग के आरोप में निलंबित किये गए सेच्चिनाटो ने उस खिलाड़ी को हरा दिया था जो हमारे दौर के टेनिस की महान त्रयी (फेडरर-नडाल-जोकोविच) में शामिल है.

दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी रहे नोवाक जोकोविच 72वें नंबर के खिलाड़ी से 6-3,7-6,1-6,7-6 (13-11) से हार गए थे. दुनिया के वे टेनिस विशेषज्ञ हैरान थे जिन्होंने कहा था कि जोकोविच यह मुकाबला अासानी से जीत लेंगे. लेकिन सेच्चिनाटो ने पेरिस में तहलका मचा दिया. जोकोविच को हराकर वे 1978 के बाद किसी ग्रैंड स्लैम मुकाबले के सेमीफाइनल मुकाबले में पहुंचने वाले इटली के पहले खिलाड़ी बन गए हैं.

जिन सेच्चिनाटो के करियर को रफ्तार पकड़ने से पहले ही प्रतिबंध के काले बादलों ने घेर लिया था. वही, आज सातवें आसमान पर हैं. 1999 के बाद फ्रेंच ओपन में सबसे कम वरीयता वाला खिलाड़ी सेमीफाइनल में पहुंचा है. फ्रेंच ओपन के मुकाबले क्वार्टर फाइनल से ही गर्मी पकड़ते हैं. उस पर भी अगर आपने जोकोविच जैसे खिलाड़ी को हरा दिया हो तो सुर्खियां आपको पलकों पर उठा लेती हैं. वैसे सेच्चिनाटो प्री क्वार्टर फाइनल में भी कमाल कर चुके थे.उन्होंने टूर्नामेंट में आठवीं वरीयता प्राप्त बेल्जियम के डेविड गॉफिन को 7-5,4-6,6-0,6-3 से हराकर टेनिस के जानकारों को चौंका दिया था. लेकिन साफ है कि उससे भी बड़ा कमाल अभी बाकी था.

दो साल का निलंबन

नोवाक जोकोविच के साथ मार्को सेच्चिनाटो के क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले यूएसटुडेडॉटकॉम ने लिखा , ‘भले ही दुनिया उस खिलाड़ी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती, लेकिन अपना 12वां ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल खेलने जा रहे जोकोविच उसके बारे में भलीभांति जानते हैं जिससे उनका मुकाबला है.’ जोकोविच वाकई अपने से उम्र में पांच साल छोटे सेच्चिनाटो की उस जिंदगी के बारे में जानते थे जो किसी परीकथा जैसी नहीं थी, बल्कि खुद सेच्चिनाटो उसके एक हिस्से को दुःस्वप्न की तरह भुला देना चाहते हैं. 2013 में इटली के सिसली के सेच्चिनाटो ने अपना पहला एटीपी टूर्नामेंट खेला. लेकिन 2016 में इटली टेनिस फेडरेशन ने उन्हें दो साल के लिए टेनिस से प्रतिबंधित कर दिया. उन पर आरोप था कि उन्होंने मोरक्कन चैलेंजर टूर्नामेंट के मैच फिक्स किये थे. हालांकि बाद में अपील पर उनका प्रतिबंध एक साल कम कर दिया गया. माना गया कि उन्होंने मैच के लिए शर्त जरूर लगाई थी, लेकिन वे जानबूझकर मैच नहीं हारे. सिसली के इस खिलाड़ी पर वक़्त कड़ा गुजर रहा था.

मोंंटे कार्लो की सड़कों से रोलां गैरो तक

जोकोविच इस खिलाड़ी को इससे इतर भी जानते थे. जोकोविच और सेच्चिनाटो का सामना मोंटे कार्लो की सड़कों पर जब तब हो जाया करता था. जोकोविच मोंटे कार्लो में रहते हैं और यहीं इटली का यह खिलाड़ी एक टेनिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रहा था. जोकोविच सेच्चिनाटो के साथ प्रैक्टिस भी किया करते थे. सेच्चिनाटो के प्री क्वार्टरफाइनल जीतने के बाद जोकोविच ने कहा भी था कि वह अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन टेनिस खेल रहा है. सेच्चिनाटो का कहना था कि जोकोविच के साथ ग्रैंड स्लैम में खेलना ही उपलब्धि है.

लकी लूजर पर किस्मत मेहरबान

नियति भी सेच्चिनाटो के साथ अजब खेल खेलती है. फ्रेंच ओपन का सेमीफाइनल खेलने जा रहे इस खिलाड़ी ने अभी तक महज एक एटीपी टूर्नामेंट ही जीता है. वह भी बुडापेस्ट में बतौर लकी लूजर. टेनिस में लकी लूजर उसे कहते हैं जो टूर्नामेंट के ड्रा में क्वालीफाई न कर पाए, लेकिन किसी खिलाड़ी के हटने से उसे मौका मिले और वह खिताब जीत ले. बुडापेस्ट में ऐसा ही हुआ. सेच्चिनाटो ने खिताब जीता. उनकी रूठी किस्मत उनपर मेहरबान हो चुकी थी.

पेरिस के रोलां गैरो में भी किस्मत उनके साथ थी. अपनी चोट से उबर रहे जोकोविच उनसे पहला सेट 6-3 से हार गए. दूसरे में जोकोविच ने वापसी की लेकिन बाजी मार्को के हाथ लगी.तीसरे सेट में जोकोविच ने जब सेच्चिनाटो को 1-6 से हराया तो लगा कि फिर अनुभव ही बोलेगा. लेकिन लंबी रैली और जोकोविच के हर एडवांटेज को ड्यूस में बदलते सेच्चिनाटो का इरादा कुछ और था. अंतिम सेट में तनाव चरम पर था. जो जोकोविच के चेहरे पर भी महसूस हो रहा था. ट्राई ब्रेकर जब लंबा खिंच रहा था तो कोर्ट पर बैठे बेहद भद्र दर्शकों की धड़कनें तेज थीं. ऐसा लग रहा था कि जोकोविच अपने लंबे अनुभव का फायदा उठाएंगे. रिकॉर्ड सेच्चिनाटो के खिलाफ थे, लेकिन किस्मत सेच्चिनाटो के साथ थी. एक हफ्ते पहले जिसके नाम महज एक एक एटीपी टूर था, जिसने ग्रैंड स्लैम का कोई मैच नहीं जीता था, जो हमेशा पहले ही राउंड में हारा था. वह अब ऑस्ट्रिया के डॉमिनिक थीम के खिलाफ फ्रेंच ओपन का सेमीफाइनल खेल रहा होगा. रैकेेट के दम ने कभी मैच फिक्स करने के लिए बदनाम हुुए इस खिलाड़ी को लाल बजरी पर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराने का मौका दे दिया है.