महाराष्ट्र के पुणे में हुई भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी भी पुणे पुलिस की नजर में हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार गुरुवार को पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त रवींद्र कदम ने कहा कि जिग्नेश मेवाणी भी भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम यलगार परिषद की बैठक में मौजूद थे, इसलिए जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर उन्हें भी समन भेजा जाएगा.

पुणे पुलिस ने बुधवार को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दिल्ली, मुंबई और नागपुर से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, रोना विल्सन, शोमा सेन और महेश राउत के नाम शामिल हैं. इस गिरफ्तारी के बारे में पुलिस आयुक्त रवींद्र कदम ने कहा, ‘आठ जून को दर्ज मामले में शामिल आरोपितों में से कुछ पर नक्सलियों से जुड़े होने के मामले पहले से दर्ज थे. हम उन संपर्कों की जांच कर रहे हैं और इस सिलसिले में हमने कुछ आरोपितों के घरों में छापेमारी की है.’ उन्होंने आगे कहा कि आरोपित रोना विल्सन के घर से पुलिस को पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और अन्य दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. रवींद्र कदम ने यह भी कहा, ‘हमें रोना विल्सन और सुरेंद्र गाडलिंग के नक्सलियों से जुड़े होने की भी जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है.’ पुणे की अदालत ने सभी पांचों आरोपितों को 14 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

भीमा कोरेगांव युद्ध 1 जनवरी 1818 को हुआ था. इसमें 500 सैनिकों की अंग्रेजी सेना ने बाजीराव द्वितीय के 28 हजार पेशवा सैनिकों को परास्त कर दिया था. अंग्रेजी सेना में ज्यादातर सैनिक महार समुदाय से थे, जिन्हें तब अछूत माना जाता था. दलित समुदाय इसे महार सैनिकों की जीत के रूप में मनाता है और हर साल यहां समारोह आयोजित करता है. इस साल इसकी 200वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में हिंसा भड़क उठी थी.