पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण स्वीकार करना पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में है. संघ के मुख्यालय नागपुर में आज यह कार्यक्रम आयोजित हुआ है और फेसबुक-ट्विटर पर प्रणब मुखर्जी के इस कार्यक्रम में जाने को लेकर सुबह से तीखी बहस चल रही थी.

कांग्रेस के कई नेता प्रणब मुखर्जी द्वारा संघ का न्योता स्वीकार करने पर पहले ही आपत्ति जता चुके हैं, वहीं कल पूर्व राष्ट्रपति की बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी इस पर अपनी असहमति जताई थी. सोशल मीडिया में आज इस पर भी खूब चर्चा हुई है. इसी से जुड़ा एक ट्वीट है, ‘जिस तरह भाजपा ने यशवंत सिन्हा के खिलाफ उनके बेटे को खड़ा किया था, उसी तरह कांग्रेस प्रणब मुखर्जी की बेटी के कंधे का इस्तेमाल कर रही है...’

संघ के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी की उपस्थिति से असहजता दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर कांग्रेस की जमकर आलोचना हुई है. कीर्तीश भट्ट ने इस पर चुटकी ली है, ‘कांग्रेस का बस चले तो अभी बैक डेट में जाकर प्रणब मुखर्जी से राष्ट्रपति पद वापस ले ले.’ आदित्य नरहरि ने तंजभरे अंदाज में पूछा है, ‘अब चूंकि डॉ प्रणब मुखर्जी आरएसएस के कार्यक्रम में जा रहे हैं तो क्या हमें श्री एलके आडवाणी को कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में बुलाना चाहिए?’

संघ के इस कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के भाषण से जुड़ी कई बातें भी सोशल मीडिया पर शेयर हुई हैं और इसके साथ उनकी खूब तारीफ हुई है. दिलचस्प बात यह है कि यहां एक तबके का कहना है कि प्रणब मुखर्जी ने संघ कार्यकर्ताओं को संगठन की प्रचलित विचारधारा के उलट कुछ बातें सिखाने की कोशिश की है तो वहीं संघ समर्थकों के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति का भाषण ठीक उसकी विचारधारा से मेल खाता है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आज के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मौजूदगी पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

ओम थानवी | facebook/om.thanvi

प्रणब मुखर्जी का भाषण मुझे ठीक लगा. संघ के मंच से संघ को संविधान, सहिष्णुता, वास्तविक देशभक्ति, राष्ट्रवाद आदि की ज़िम्मेदारियों का पाठ पढ़ा आए… कांग्रेसी यों ही आसमान सर पर उठाए हुए थे.

वीर संघवी | @virsanghvi

... न कांग्रेस और न ही संघ, आज के विजेता तो प्रणब मुखर्जी ही रहे.

मंजुल | @MANJULtoons

राजदीप सरदेसाई | @sardesairajdeep

क्या प्रणब मुखर्जी भारत रत्न के लिए खुद को लाइन में खड़ा कर रहे हैं? भारत में अब तक जिन राष्ट्रपतियों को यह शीर्ष सम्मान मिला उनके नाम हैं – राजेंद्र प्रसाद, वीवी गिरी, एस राधाकृष्णन और एपीजे अब्दुल कलाम. इनमें से प्रसाद और वीवी गिरी को पद से मुक्त होने के बाद यह सम्मान मिला था.... क्या प्रणब मुखर्जी इस सूची में स्थान बना पाएंगे?

प्रयाग सोनार | @prayag_sonar

कांग्रेस ने तत्काल प्रभाव से प्रणब मुखर्जी की धर्मनिरपेक्षता की डिग्री वापस ले ली है.

अरुण गिरी | @arungiri

प्रणब मुखर्जी ने मोहन भागवत को प्राइम टाइम पर आरएसएस के विचार प्रसारित करने का मौका दिया है! संघ के लिए यह काम मोदी भी नहीं कर सकते थे.