सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया में कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी को लेकर संकट गहराता जा रहा है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार इंडियन कॉमर्शियल पॉयलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने कहा है कि वे कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी के मुद्दे पर प्रबंधन के साथ सहयोग को पूरी तरह से बंद कर देंगे. आईपीसीए की केंद्रीय कार्यकारी समिति को लिखे पत्र में क्षेत्रीय कार्यकारी समिति (आरईसी) ने कहा, ‘छह जून की बैठक में दिल्ली आरईसी ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि समय पर वेतन न मिलने से वित्तीय तनाव और मानसिक पीड़ा होती है, जिसके नतीजे में थकान होती है जो उड़ानों की सुरक्षा खतरे में डालता है.’ संगठन ने आगे कहा, ‘बगैर किसी सूचना के वेतन भुगतान में देरी को देखते हुए आरईसी ने वेतन भुगतान नियमित होने तक प्रबंधन के साथ सहयोग पूरी तरह रोकने का फैसला किया है.’

आरईसी ने एयर इंडिया के प्रबंधन पर मौजूदा कर्मचारियों के हितों को अपनी प्राथमिकताओं में निचले पायदान पर रखने का भी आरोप लगाया. अपने पत्र में उसने कहा, ‘हमारा प्रबंधन मौजूदा कर्मचारियों के हितों को रिटायर कर्मचारियों के हितों से भी नीचे रखता है. वह ट्रेनिंग के लिए संविदा पर पायलटों की नियुक्ति करके अपने कर्मचारियों के मनोबल और पेशागत विकास को प्रभावित कर रहा है.’

एयर इंडिया मई में अपने 11 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का वेतन समय पर देने में असफल रही है. सूत्रों के मुताबिक उसे अप्रैल से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. इससे उबरने के लिए उसने वित्तीय संस्थानों और बैंकों के सामने सरकार की गारंटी पर एक साल के लिए 1,000 करोड़ रुपये के कर्ज का प्रस्ताव रखा है. इससे अगले हफ्ते तक कर्मचारियों का वेतन मिलने की उम्मीद है. इस बीच एयर इंडिया की विनिवेश की कोशिशों को भी झटका लगा है. सरकार द्वारा तय 31 मई तक की समय-सीमा में एक भी बोलीकर्ता बोली लगाने के लिए आगे नहीं आया है.