केरल कांग्रेस में नई हलचल शुरू हुई है. ख़बरों के मुताबिक 21 जून को होने वाले राज्य सभा उपचुनाव में कांग्रेस केरल से एक सीट आसानी से जीतने की स्थिति में थी. लेकिन उसने यह सीट केरल कांग्रेस (मणि) के नेता केएम मणि को देने का फ़ैसला किया है. जबकि राज्य सभा के मौज़ूदा उपसभापति पीजे कुरियन को उम्मीद थी कि कांग्रेस उन्हें इस सीट से फिर उम्मीदवार बनाएगी. कुरियन का कार्यकाल 30 जून को पूरा हो रहा है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कुरियन ने इस पर अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ताई है. उन्होंने इसके लिए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने ही मणि को यह सीट उपहार में देने की योजना बनाई और फिर उसे लागू भी किया. केरल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष वीएम सुधीरन ने भी कहा, ‘यह सीट कांग्रेस के लिए राज्य में बेहद अहम थी. लेकिन इसे केरल कांग्रेस को दे दिया गया जिसने यूडीएफ (कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन) को यूं ही छोड़ दिया था. ऐसे में उसे अपने हक़ की सीट देना न्यायोचित नहीं कहा सकता.’

वहीं द हिंदू की मानें तो हाल में ही कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए ओमन चांडी की पहल पर पार्टी नेतृत्व ने सोच समझकर यह सीट मणि को देने का फ़ैसला किया है. इसका मक़सद मणि को यूडीएफ में वापस लाना है. बताया जाता है कि इसके लिए यूडीएफ के घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के महासचिव पीके कुन्हालिकुट्टी ने अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और केएम मणि के बीच मध्यस्थता की है. ग़ौरतलब है कि मणि ने कांग्रेस से मतभेद के चलते 2016 में राज्य विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यूडीएफ छोड़ दिया था.