केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान से अमेरिकी कंपनियां ख़ास तौर पर परेशान हैं. इन कंपनियों का मानना है कि इस अभियान से अमेरिकी निर्यात पर उल्टा असर पड़ रहा है. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से भी इस संबंध में अपनी चिंताएं साझा की हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एडवांस्ड मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन (एडवामेड) दुनिया में चिकित्सा उपकरण बनाने वाली कंपनियों का सबसे बड़ा संगठन है. इस संगठन के प्रतिनिधियों ने ट्रंप प्रशासन के दो वरिष्ठ अधिकारियों- रॉबर्ट लाइथाइज़र और विल्बर रॉस से मुलाकात की थी. इनमें विल्बर रॉस वाणिज्य सचिव (वाणिज्य मंत्री) हैं. जबकि लाइथाइज़र व्यापार विभाग के शीर्ष अधिकारी हैं. इन दोनों अधिकारियों को एडवामेड के प्रतिनिधियों ने एक ज्ञापन सौंपा था जिसमें ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को संरक्षणवादी कदम बताया गया था.

सूत्रों के मुताबिक वॉशिंगटन डीसी स्थित संगठन- एडवामेड के प्रतिनिधियों ने अपने ज्ञापन में साफ कहा था कि भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’ के ज़रिए भारतीय कंपनियों को संरक्षण दे रही है. इसी कारण से वह चिकित्सा तकनीक से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों को भारत मे उनकी उपस्थिति बढ़ाने के लिहाज़ से प्रोत्साहन भी नहीं दे रही है. भारत में बाहरी कंपनियों के रास्ते में कीमत नियंत्रण एक बड़ी बाधा है. इसके अलावा नियामक वातावरण भी ऐसा है जिसके बारे में पहले से कुछ कहा नहीं जा सकता. इस मामले में पारदर्शिता बिल्कुल नहीं रखी जा रही है.

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार ने फरवरी और अगस्त 2017 में कोरोनरी स्टेंट (दिल के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाला उपकरण) और नी इंप्तांट (घुटना प्रत्यारोपण के लिए काम आता है) की अधिकतम मूल्य सीमा तय कर दी थी. इसके पीछे मक़सद बताया गया था कि इस किस्म के उपकरण ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को उपलब्ध हो सकें इसलिए यह कदम उठाया गया है. लेकिन एडवामेड ने तब इसका पुरज़ोर विरोध किया था. उसकी दलील थी कि इससे भारत में मरीज़ों को विश्वस्तर के चिकित्सकीय उपकरण मिलने और नए प्रयोगों के रास्ते में बाधा आएगी.