स्पेन के बारे में प्रसिद्ध है कि वह कैथोलिक ईसाई धर्मभीरुओं का देश है. सच्चाई यह है कि दो-तिहाई स्पेनी तो अब भी अपने आप को कैथोलिक बताते हैं. एक-तिहाई भी ऐसे हैं जो कभी न कभी किसी चर्च में चले ही जाते हैं.

इसी स्पेन में शनिवार दो जून को पहली बार एक ऐसा व्यक्ति प्रधानमंत्री बना है, जिसने देश के राजा के सामने किसी बाइबल या ईसामसीह के सलीब (क्रॉस) पर हाथ रखे बिना अपने पद की शपथ ली है. ये हैं स्पेनी सोशलिस्ट पार्टी के 46 वर्षीय महासचिव पेद्रो सांचेज़. वे अभी सांसद भी नहीं हैं लेकिन, उन्होंने अब तक प्रधानमंत्री रहे 63 वर्षीय मारियानो राख़ोय को, किसी चुनाव के जरिये नहीं बल्कि अविश्वास प्रस्ताव द्वारा अपना पद छोड़ने पर विवश किया.

1975 में स्पेन के बर्बर तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रांको की मृत्यु के बाद जून 1977 में वहां पहली बार स्वतंत्र और निष्पक्ष आम चुनाव हुए थे. तब से लेकर अब तक ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी प्रधानमंत्री को किसी अविश्वास प्रस्ताव के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा है.

भ्रष्टाचार कांड राख़ोय को ले डूबा

मारियानो राख़ोय कई पार्टियों के समर्थन से बनी सरकार के प्रधानमंत्री थे. वे पिछले साढ़े छह वर्षों से सरकार चला रहे थे. 24 मई से सप्ताह-भर पहले स्पेन में खुद सांचेज़ और राख़ोय सहित शायद ही किसी ने सोचा हो कि संसद के दो साल के शेष कार्यकाल से पहले ही राख़ोय को अपनी कुर्सी ख़ाली करनी पड़ सकती है.

असल में राख़ोय के भाग्य का सितारा गुरुवार 24 मई को अचानक तब डूबने लगा जब स्पेन के राष्ट्रीय (सर्वोच्च) न्यायालय ने एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार कांड पर अपना फ़ैसला सुनाया. राखोय की रूढ़िवादी पार्टी ‘पार्तिदो पोपुलार’ (जनता पार्टी) ने, जिसके वे अक्टूबर 2004 से अध्यक्ष थे, अपने चुनाव प्रचार के लिए पैसा जुटाने के उद्देश्य से गोपनीय काले कोष बना रखे थे. 1999 से 2005 तक चले इन कोषों के लिए जो उद्योगपति पैसा देते थे, उन्हें बदले में आकर्षक ठेके आदि मिलते थे. दूसरे शब्दों में, पार्टी आकर्षक ठेके देने-दिलाने के लिए घूस ले रही थी. फ्रांसिस्को कोर्रेआ नाम का एक उद्योगपति इस गोरखधंधे का बिचौलिया या मुख्य कर्ता-धर्ता बताया जाता है. उसी के नाम पर स्पेन में इस गोरखधंधे को ‘कोर्रेआ भ्रष्टाचार कांड’ भी कहा जाता है.

धोखाधड़ी का जाल

यह भी कहा जाता है कि कोर्रेआ ने अपने तीन कर्मचारियों के सहयोग से सरकारी अनुदान (सब्सिडी) पाने की धोखाधड़ी का एक बहुत बड़ा जाल भी बिछा रखा था. राख़ोय की ‘जनता पार्टी’ के एक पूर्व कोषाध्यक्ष लुई बार्सेनास और कोर्रेआ की मिलीभगत थी. दोनों ने मिल कर तत्कालीन सरकारों को चूना लगाने, घूस के बदले ठेके देने, कर-चोरी और काले धन को सफ़ेद बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

बार्सेनास को पहले ही 33 साल जेल की सज़ा सुनाई जा चुकी थी. 24 मई के दिन पार्टी के 29 और लोगों को सज़ाएं सुनाई गईं. मारियानो राख़ोय इस कांड में सीधे तौर पर तो लिप्त नहीं थे, पर सारी कलई खुलने के अंतिम चरण में वही पार्टी के अध्यक्ष थे. न्यायालय ने पार्टी पर 2,45,000 यूरो का ज़ुर्माना भी ठोक दिया है, इसलिए प्रधानमंत्री बने रहने का उनके पास कोई नैतिक आधार नहीं रह गया था.

न्यायालय ने अपने निर्णय में दोटूक यह भी कहा कि राख़ोय की पार्टी ‘पार्तिदो पोपुलार के भीतर भ्रष्टाचार का बाक़ायदा एक सांस्थानिक तंत्र है.’ न्यायालय का यह अप्रत्याशित फ़ैसला पूरे देश को हिलाने और चौंकाने वाला था. सोशलिस्ट पार्टी के नेता पेद्रो सांचेज़ यह फ़ैसला आने से पहले ही रणनीति बनाने लगे थे कि यदि इस तरह का फ़ैसला आ ही गया, तो वे सत्ता के शिखर तक कैसे पहुंच सकते हैं.

‘क्या आप कलकत्ता की मदर टेरेसा हैं?’

न्यायालय का फ़ैसला आने के दूसरे दिन स्पेनी संसद में उस पर बहस के दौरान सांचेज़ ने प्रधानमंत्री राख़ोय को ललकारते हुए कहा, ‘क्या अब आप अपना पद छोड़ेंगे? त्यगपत्र दीजिये और सारा बखेड़ा ख़त्म हो जायेगा.’ राख़ोय ने उन से पूछा, ‘किस नैतिक अधिकार के साथ आप ऐसी बात कर रहे हैं? क्या आप शायद कलकत्ता की मदर टेरेसा हैं?’

इस उत्तर से सांचेज़ को यह ताड़ते देर नहीं लगी कि मारियानो राख़ोय त्यागपत्र नहीं देंगे. उन्हें धक्का मार कर हटाना पड़ेगा. उन्हें यह भी लगा कि शायद यही वह मौका है जब देश की जनता और संसद की अन्य पार्टियों का समर्थन जुटा कर अपनी सरकार बनायी जा सकती हैं. पर्दे के पीछे रह कर यह समर्थन जुटाना उन्होंने पहले ही शुरू कर दिया था. 350 सीटों वाली संसद में उनकी पार्टी की 84 सीटें हैं और राख़ोय की पार्टी की 134. शेष 126 सीटें अन्य पार्टियों के बीच बंटी हुई हैं. बहुमत बनाने के लिए कम से कम 176 सीटों का समर्थन मिलना ज़रूरी था.

राख़ोय के ख़याली पुलाव

दूसरी ओर, 24 मई के दिन का फ़ैसला आने तक प्रधानमंत्री मारियानो राख़ोय यही ख़याली पुलाव पकाते रहे कि उनकी सरकार भले ही एक अल्पमत पार्टी की सरकार है, लेकिन जो पार्टियां इस समय उनके साथ हैं, वे सत्ता के सुखभोग के लिए आगे भी उनके साथ ही रहेंगी. वे मान कर चल रहे थे कि सोशलिस्ट पार्टी के मुखिया पेद्रो सांचेज़ अपने पक्ष में इतने सांसद कभी नहीं जुटा पायेंगे कि उनके लिए चुनौती बन सकें. पेद्रो सांचेज़ भी जानते थे कि वे कोई मध्यावधि संसदीय चुनाव जीत नहीं पायेंगे. इसलिए बेहतर है कि राख़ोय की वर्तमान अलोकप्रियता का लाभ उठाते हुए अविश्वास प्रस्ताव ला कर वे अपना भाग्य आजमाएं.

126 सीटों वाली संसद की अन्य पार्टियों की रीति-नीति देखते हुए सोशलिस्ट पार्टी के नेता पेद्रो सांचेज़ का समीकरण यह कह रहा था कि यदि उन्हें छह ऐसी पार्टियों का तात्कालिक समर्थन मिल जाये, जो इस समय उन्हें प्रधानमंत्री बनाने से अधिक राख़ोय को हटाने के लिए लालायित हैं, तो उनका काम बन जायेगा. यही हुआ.

एक छोटी पार्टी के वोट बड़े काम आये

गुरुवार 31 मई को संसद में बहस चल रही थी, पर प्रधानंमत्री राख़ोय दोपहर बाद बहस छोड़ कर ग़ायब हो गये. बाद में उन्हें अपने कुछ घनिष्ठ समर्थकों के साथ पास ही के एक रेस्त्रां में देखा गया. वहां वे घंटों बैठे रहे, पर संसद में नहीं लौटे. उन्हें आभास हो गया था कि उनकी लुटिया अब डूबने वाली है. अगले दिन, एक जून को अविश्वास प्रस्ताव पर जब मतदान हुआ, तो पेद्रो सांचेज़ को अपनी विजय के लिए निर्णायक वोट असंतुष्ट बास्क प्रदेश की उस ‘पीएनवी’ पार्टी के पांच वोटों के तौर पर मिले, जिसने कुछ समय पहले इन्हीं वोटों से राख़ोय सरकार के बजट को जैसे-तैसे पारित करवाने में हाथ बंटाया था. अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में कुल 180 और विपक्ष में 169 वोट पड़े. एक वोट अनिर्णित रहा..

स्पेनी संविधान का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव ‘रचनात्मक’ (कंस्ट्रक्टिव) होना चाहिये. यानी, वह किसी सरकार को गिराने के बदले नयी सरकार बनाने पर लक्षित होना चाहिये, अविश्वास प्रस्ताव तभी लाया जा सकता है, जब प्रस्ताव लाने वाली पार्टी पहले से ही अपनी सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत जुटा चुकी हो.

मनमाने ढंग से अविश्वास प्रस्ताव नहीं

इस नियम के कारण ऐसा नहीं हो सकता कि कोई भी छोटी-बड़ी पार्टी मनमाने ढंग से कभी भी अविश्वास प्रस्ताव लाकर किसी सरकार को पहले गिरा दे और बाद में नयी सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ या मार-धाड़ चलने लगे, जैसा भारत में संभव है. एक बार किसी की सरकार बन जाने पर दोबारा कोई अविश्वास प्रस्ताव तब तक नहीं लाया जा सकता, जब तक एक नया बहुमत साबित न किया जा सके.

इसका यह भी अर्थ हुआ कि जो पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है, उसे पहले ही सुनिश्चित कर लेना होगा कि संसद में मतदान के समय उसे बहुमत मिल पायेगा या नहीं. प्रस्ताव पारित होने पर वही पार्टी अगली सरकार बनायेगी. पेद्रो सांचेज़ इसीलिए आशा कर रहे हैं कि उन्हें मध्यावधि चुनावों का सामना नहीं करना पड़ेगा. जहां तक है, दो साल बाद अगले संसदीय चुनावों तक तो उनकी सरकार बनी रह सकती है. अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के दूसरे ही दिन, यानी शनिवार दो जून को, स्पेन के राजा फेलिपे ने अपने राजमहल में उन्हें पद की शपथ दिलायी.

कतालोनिया में भी नयी सरकार

दो जून वाले उसी दिन स्पेन के विद्रोही प्रदेश कतालोनिया की राजधानी बार्सिलोना में भी एक नयी सरकार के 13 मंत्रियों को शपथ दिलायी गयी. इसके साथ ही अक्टूबर 2017 में उस पर थोपे गये केंद्र सरकार के अलोकप्रिय शासन का अंत हुआ. केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2017 में कराये गये चुनावों के बाद भी कतालोनिया में उन्हीं पृथकतावादी पार्टियों के गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला था, जिन्हें माद्रिद (मैड्रिड) में प्रधानमंत्री राख़ोय की सकार ने दो महीने पहले जबरन हटा दिया था.

इन पार्टियों ने जब-जब नयी सरकार बनाने का प्रयास किया, राख़ोय की सरकार ने तब- तब उनके प्रयास को अमान्य कर दिया. कहा कि मंत्रियों की सूची में पिछली प्रदेशिक सरकार में मंत्री रहे ऐसे नाम स्वीकार नहीं किये जा सकते, जो इस समय जेल में या किसी दूसरे देश में हैं. कतालोनिया की नयी सरकार के प्रमुख को अततः यह शर्त माननी पड़ी.

नये मुख्यमंत्री पिछले मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र

नये मुख्यमंत्री क्विम तोर्रा कतालोनिया के पिछले सरकार-प्रमुख रहे कार्लेस पुज्देमोन के एक विश्वासपात्र घनिष्ठ सहयोगी हैं. पुज्देमोन अक्टूबर में अपदस्थ किये जाने के बाद अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले ब्रसेल्स में थे, पर अब बर्लिन में हैं. फिनलैंड की एक यात्रा के बाद 25 मार्च 2018 को वे कार से ब्रसेल्स लौटते समय जब जर्मनी के एक हाईवे पर से गुज़र रहे थे, तो जर्मन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

पुज्देमोन इस समय जेल में नहीं हैं, पर वे तब तक जर्मनी से बाहर नहीं जा सकते जब तक स्पेन द्वरा जारी एक यूरोपीय वारंट के कारण उनके प्रत्यर्पण के बारे में कोई अंतिम अदालती फ़ैसला नहीं हो जाता. कतालोनिया की नयी सरकार के मुख्यमंत्री क्विम तोर्रा का कहना है कि वे भी कतालोनिया की स्वतंत्रता चाहते हैं और तभी तक मुख्यमंत्री रहेंगे, जब तक पुज्देमोन वापस नहीं आ जाते.

नये प्रधानमंत्री के रंग-ढंग

स्पेन के नये प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ का कहना है कि वे भ्रष्टाचार से लड़ेंगे और देश का लोकतांत्रिक नवीकरण करेंगे. वे कतालोनिया के नये मुख्यमंत्री क्विम तोर्रा से भी मिलेंगे, हालांकि कुछ ही दिन पहले तोर्रा को उन्होने ‘नस्लवादी’ कहा था. मारियानो राख़ोय की तरह

पेद्रो सांचेज़ भी कतालोनिया या बास्क प्रदेश की स्वतंत्रता के विरोधी हैं, भले ही अतीत में वे यह भी कहते रहे हैं कि कतालोनिया ओर बास्क प्रदेश स्पेन की सीमाओं के भीतर कोई क्षेत्र ही नहीं, राष्ट्र (अलग क़ौम) भी हैं. राख़ोय उन्हें राष्ट्र का दर्जा देने को कतई तैयार नहीं थे.

पेद्रो सांचेज़ ने गुरुवार 7 जून को अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के नामों की भी घोषणा कर दी. कुल 17 में से 11 मंत्री महिलाएं हैं. महिलाएं ही उपप्रधानमंत्री से लेकर अर्थ, श्रम, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा गृहमंत्रालय जैसे कई प्रमुख विभागों को संभालेंगी. जिस महिला वकील को गृहमंत्री बनाया गाया है, वे स्पेन की एकता की कायल कतालोनिया की प्रदेशिक सोशलिस्ट पार्टी की एक नेता हैं.

विदेशमंत्री सोशलिस्ट से अधिक फ़ासिस्ट

लेकिन विदेश मंत्रालय कतालोनिया के ही 71 वर्षीय घोर ‘स्पेनी राष्ट्रवादी’ जोसेप बोर्रेल को सौंपा गया है. वे कतालोनिया के स्वतंत्रता आंदोलन के कट्टर विरोधी हैं. कतालोनिया की स्वतंत्रता के समर्थक उन्हें सोशलिस्ट से अधिक फ़ासिस्ट मानते हैं. वहां के पिछले मुख्यमंत्री कार्लेस पुज्देमोन ने बोर्रेल को विदेशमंत्री बनाये जाने पर बर्लिन से टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया, ‘क्या यही घृणा के बदले तनाव घटाने वाले भाईचारेपन का प्रतीक है?’

कतालोनिया के स्वतंत्रता प्रेमी स्पेन की नई संघीय सरकार की इस घोषणा से भी बहुत व्यथित हैं कि कतालोनिया पर से केंद्र सरकार का शासन उठ जाने के बावजूद उसके वित्त मंत्रालय पर केंद्र सरकार का नियंत्रण बना रहेगा. प्रेक्षक मानते हैं कि अपने मंत्रियों के नामों और विभागों द्वरा पेद्रो सांचेस यह संकेत देने में तो सफल रहे हैं कि उनका मंत्रिमंडल अपने काम के विशेषज्ञों, अनुभवी नेताओं और युवा नये चेहरों के मेल के साथ एक बिल्कुल नयी कार्यशैली का परिचायक होगा. लेकिन वे यह विश्वास जगाने में सफल नहीं कहलायेंगे कि उनकी सरकार कतालोनिया और बास्क प्रदेश की आशाओं-आकांक्षाओं के साथ भी न्याय कर पायेगी.