मोदी सरकार ने देश की नौकरशाही में प्रवेश पाने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है. रविवार को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने इस बारे में अधिसूचना जारी की थी. इसके मुताबिक 10 अहम विभागों में संयुक्त सचिव के पद के लिए 30 जुलाई तक आवेदन मांगे गए हैं. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. सरकार ने इसे हर नागरिक को प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से देश का विकास सुनिश्चित करने का मौका देने जैसा बताया है. वहीं, विपक्ष ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है. राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे संविधान और आरक्षण का घोर उल्लंघन बताते हुए कहा, ‘कल को ये (मोदी सरकार) बिना चुनाव प्रधानमंत्री और कैबिनेट बना लेंगे.’ इसके अलावा लोकसभा चुनाव में बसपा को ज्यादा सीटें देने के लिए राजी होने संबंधी अखिलेश यादव का बयान और जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका का अलग-थलग पड़ना भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है.

सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काना भीड़ को भड़काने के समान : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने को भीड़ को भड़काने के समान बताया है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक अदालत ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा, ‘चाहे लोगों की भीड़ इकट्ठी कर हिंसा के लिए उन्हें भड़काया जाए या सोशल मीडिया पर. इन दोनों की परिस्थितियां एक समान होती हैं. इस याचिका को दायर करने वाले अरविंदर सिंह के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज है. इस सुनवाई के दौरान आरोपित के वकील ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर अलग खालिस्तान बनाने के पक्ष में सिख युवकों को शामिल होने की अपील की थी जिसे राजद्रोह नहीं माना जा सकता. उधर, पंजाब सरकार का कहना है कि आरोपित ने न केवल इसकी अपील की थी बल्कि, एक समुदाय विशेष के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया भी था.

उत्तर प्रदेश : केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ छात्रों द्वारा बदतमीजी

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ छात्रों द्वारा बदतमीजी करने का मामला सामने आया है. हिन्दुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में कई कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद रविवार रात आठ बजे वाराणसी जाते वक्त उनके साथ यह घटना घटी. बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री ने वाराणसी के एसएसपी सहित अन्य अधिकारियों को इसकी जानकारी दी. इसके बाद भदोही के रहने वाले तीनों आरोपित छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया. इस घटना के बारे में अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके पति आशीष पटेल का कहना है कि हर बार मिर्जापुर में मंत्री के साथ ऐसा ही होता है. उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से करने की बात कही है.

सूचना आयुक्तों के दर्जे को कम करने पर विचार

केंद्र सरकार मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और अन्य सूचना आयुक्त (आईसी) के दर्जे को कम कर सकती है. फिलहाल इन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और चुनाव आयुक्तों के समकक्ष माना जाता है. द एशियन एज को एक सूत्र ने बताया कि इन संस्थानों के कार्यों में अंतर होने की वजह से यह कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है. सूत्र के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट देश का तीसरा खंभा है और इस पर संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही, चुनाव आयोग भी संवैधानिक संस्था है. दूसरी ओर, केंद्रीय सूचना आयोग संवैधानिक न होकर वैधानिक संस्था है. साथ ही, इसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट ही नहीं बल्कि हाई कोर्ट में भी चुनौती दी जा सकती है.

ओडिशा : एक मानव कंकाल के साथ ग्रामीणों ने एक मामले की जांच की मांग की

ओडिशा के नुआपाड़ा में भैंसादानी गांव के लोगों ने एक मानव कंकाल के साथ 15 किलोमीटर की दूरी तय कर पुलिस स्टेशन पहुंच कर एक मामले की जांच की मांग की है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक यह कंकाल गांव के स्वास्थ्यकर्मी सुकल साई पहाड़िया का बताया जाता है. अखबार के मुताबिक उनकी पत्नी सौभाग्य पहाड़िया ने बताया, ‘बीती 19 अप्रैल को मेरे पति को पुलिस ने समन भेजा था. उसके बाद वे घर नहीं लौटे हैं. बीते शनिवार को गांव के चार लोग जंगल गए थे तो उन्हें एक कंकाल मिला. मुझे नहीं मालूम कि यह कंकाल किसका है. लेकिन, कंकाल के पास मिला टॉवेल, बैग, मोबाइल फोन और चप्पल मेरे पति का ही था.’ ग्रामीणों ने गांव में पहली बार पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले सुकल साई पहाड़िया की पुलिस हिरासत में मौत होने की आशंका जाहिर की है. साथ ही, वे इस मामले की जांच की मांग कर रहे हैं. उधर, पुलिस ने कथित मृतक के लापता होने संबंधी शिकायत दर्ज होने से इनकार किया है.