भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध भले तनावपूर्ण हों लेकिन सूत्रों की मानें तो इसके बावज़ूद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने इस जटिल पड़ोसी देश के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी कर रही है. चीन में अभी-अभी हुए एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) के सदस्य देशों की बैठक से यह संकेत निकला है. भारत इस संगठन की बैठक में पहली बार पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल हुआ है.

द हिंदू के मुताबिक एससीओ की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी और पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने खुशनुमा माहौल में एक-दूसरे का अभिवादन किया. साथ ही एक-दूसरे से बातचीत भी की. यही नहीं राजनयिक सूत्रों से जब यह पूछा गया कि क्या भारत अब भी इस मान्यता पर क़ायम है कि पाकिस्तान ही आतंकवाद को पनाह देने वाला इक़लौता बड़ा देश है. इस पर उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘आतंकवाद के लिए पाकिस्तान अकेले ज़िम्मेदार देश नहीं माना जा सकता.’

यही नहीं संतुलन साधने संबंधी भारत के रुख़ का संकेत देती एक अन्य ख़बर द एशियन एज़ में भी प्रकाशित हुई है. इसके मुताबिक 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्ध में आमने-सामने लड़ने वाले भारत-पाकिस्तान के सैनिक अब पहली बार एक साथ युद्ध अभ्यास भी करने वाले हैं. एससीओ के सदस्य देशों की सेनाओं का यह संयुक्त युद्ध अभ्यास 22 से 29 अगस्त के बीच रूस के चेल्या-बिंस्क में होने वाला है. इसमें भारतीय सेना के लगभग 200 सैनिक हिस्सा लेंगे.

राजनयिक सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान के साथ संतुलन साधने की भारत की इस पूरी क़वायद का मक़सद यूरेशिया (मध्य एशिया और यूरोप) तक पहुंच बनाना है. एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया भी, ‘एससीओ अपने सभी सदस्य देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है. चूंकि इस संगठन में भारत-पाकिस्तान दोनों सदस्य हैं लिहाज़ा नई दिल्ली के सामने एक मौका है कि वह पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते यूरोप और मध्य एशिया तक अपनी पहुंच सुगम बना सके.’