अभी एक दिन पहले ही ख़बर आई थी कि भारत इन दिनों पाकिस्तान के साथ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन लगता है भारत के साथ संबंध सामान्य रखने में पाकिस्तान की ज़्यादा रुचि नहीं है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान की एक हरक़त ने भारत को परेशान कर दिया है और अब भारतीय राजनयिक उस स्थिति से निज़ात पाने की कोशिश कर रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक पाकिस्तान ने उसकी सरज़मीं पर सक्रिय आतंकी संगठन- जमात-उर-अहरार (जेयूए) पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में पेश किया है. जेयूए काफ़ी समय पहले तहरीक-ए-तालिबान से अलग हुआ था. इसने हाल में ही पाकिस्तान में हुए कई आतंकी हमलों की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ली है. इनमें सैन्य प्रतिष्ठानों, कानून का पालन करने वाले अफ़सरों/कर्मचारियों, सरकारी इमारतों, राजनेताओं, अल्पसंख्यकों आदि पर हुए आतंकी हमले प्रमुख हैं.

बताया जाता है कि जेयूए पर प्रतिबंध लगाने संबंधी पाकिस्तान के प्रस्ताव पर भारत को ज़्यादा आपत्ति नहीं है. लेकिन दिक्क़त ये है कि प्रस्ताव में पाकिस्तान ने इस आतंकी संगठन को भारत से जोड़ दिया है. उसकी दलील है कि जेयूए को भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) का समर्थन हासिल ही है. वही उसे बढ़ावा दे रही है. भारत ने इसी आधार पर प्रस्ताव का विरोध किया है. वह चाहता है कि इस प्रस्ताव से भारतीय एजेंसियों का संदर्भ हटा दिया जाए.

सूत्रों के मुताबिक इस दिशा में राजनयिक प्रयास लगातार जारी हैं. इस बाबत भारत ने हाल में ही ब्रिटेन के सामने भी अपना पक्ष रखा है. ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसकी एक वरिष्ठ मंत्री बैरनेस विलियम्स इन दिनों भारत की यात्रा पर आई हुई हैं. उनसे मुलाक़ात के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने इस मसले पर भारत सरकार का पक्ष रखा है. विलियम्स ने भी आश्वासन दिया है कि उनका देश इस पर गंभीरता से विचार करेगा.