केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध टेलीफोन एक्सचेंज घोटाला मामले में सभी आरोपितों को बरी करने के फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार मंगलवार को सीबीआई की आपराधिक समीक्षा याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने सभी आरोपितों को नोटिस जारी कर 20 जून तक जवाब मांगा है. इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन सहित कुल सात आरोपित हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अवैध टेलिफोन एक्सचेंज घोटाला मामले की सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष अदालत ने इसी साल मार्च में फैसला सुनाया था. तब सीबीआई के विशेष जज नटराजन ने कहा था कि वे सभी आरोपितों को इसलिए बरी कर रहे हैं, क्योंकि पहली नजर में इनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए सबूत ही नहीं हैं. इस मामले में मारन बंधुओं के अलावा भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएस) के पूर्व महाप्रबंधक के ब्रह्मनाथन, पूर्व उप महाप्रबंधक एमपी वेलुसामी और दयानिधि मारन के निजी सचिव आरोपित हैं.

अवैध टेलिफोन एक्सचेंज घोटाले का यह मामला 2004-2007 के बीच का है, जब दयानिधि मारन केंद्र में सूचना और संचार तकनीक मंत्री थे. सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने घर में एक निजी टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किया. इसमें बीएसएनएल की 764 हाई स्पीड ब्रॉडबैंड लाइनों का इस्तेमाल करके सन टीवी को अवैध अपलिंक सेवाएं दी गईं थीं. इससे चेन्नई में बीएसएनएल और दिल्ली में महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) को कुल 1.78 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. हालांकि, मारन बंधुओं सहित सभी आरोपित इन आरोपों से इंकार करते रहे हैं.