पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जब से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं तब से उन्हें लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. यह कार्यक्रम संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित हुआ था. इसको लेकर सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि अब प्रणब मुखर्जी आरएसएस के समर्थक हो गए हैं. कहा यह भी जा रहा है कि प्रणब मुखर्जी राजनीति में वापसी करने वाले हैं. इस अटकल को शिव सेना की तरफ से आए उस बयान ने मजबूती देने का काम किया है कि अगर 2019 के आम चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिला तो आरएसएस प्रधानमंत्री पद के लिए मुखर्जी के नाम का प्रस्ताव दे सकता है. हालांकि पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इन सभी अटकलों को खारिज किया है.

इस बीच प्रणब मुखर्जी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ग़ुलाम नबी आज़ाद और पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर (फिलहाल वे पार्टी से निलंबित हैं) की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है. इसमें आज़ाद और अय्यर को अभिवादन करते हुए मुखर्जी का स्वागत करते देखा जा सकता है. लेकिन इसमें सोनिया गांधी हाथ जोड़ कर प्रणब मुखर्जी का अभिवादन नहीं कर रही हैं.

इस तस्वीर के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यही वह घटना है जिसका ज़िक्र प्रणब मुखर्जी ने अपनी किसी किताब में किया है. यह भी कहा जा रहा है कि जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन के बाद प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस से ‘आज़ाद’ होने का मन बना लिया था और यही उनके आरएसएस के कार्यक्रम में जाने का कारण भी बना. फ़ेसबुक पर हज़ारों लोगों ने इससे जुड़ी पोस्ट को लाइक और शेयर किया है. यह तस्वीर वॉट्सएप पर इस मैसेज के साथ देखी जा सकती है :

प्रणब दा ने अपनी किताब में लिखा है : 

मोदीजी के कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने पर जब मैंने उनके कार्य की प्रशंसा की, तब से सोनियाजी मुझसे नाराज़ थीं. एक बार संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद मेरा और उनका आमना-सामना हुआ. उनके साथ आए (ग़ुलाम नबी) आज़ाद और (मणिशंकर) अय्यरजी ने मेरा अभिवादन किया. लेकिन सोनियाजी चाहती थीं कि मैं पहले उनका अभिवादन करूं. वे भूल रही थीं कि वे भारत के राष्ट्रपति के सामने हैं न कि प्रणब मुखर्जी के सामने. मुझे यह बात अंदर तक चुभ गई कि जो व्यक्ति भारत के प्रथम व्यक्ति का सम्मान नहीं करता वो ग़ुलामपसंद है. मैं इस गुलामी से आज़ाद होना चाहता था.

शायद इसलिए प्रणव दा आरएसएस के कार्यक्रम में शरीक हुए.

अब सवाल है कि इस तस्वीर के हवाले से जो बात कही जा रही है, उसे कितना सच माना जाए. जांच-पड़ताल के बाद यह बता पाना तो मुश्किल है कि सोनिया गांधी ने हाथ जोड़कर प्रणब मुखर्जी का अभिवादन किया था या नहीं. दरअसल जिस दौरान तीनों कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी के आमने-सामने थे उस समय की कोई और तस्वीर हमें नहीं मिली.

हालांकि गूगल पर सर्च करते समय हमें एक और तस्वीर मिली. इसमें बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं का अभिवादन स्वीकार कर रहे हैं. यह मार्च, 2015 की तस्वीर है. तब मोदी सरकार के भूमि विधेयक के ख़िलाफ़ विपक्ष राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ज्ञापन सौंपने राष्ट्रपति भवन पहुंचा था. उस दौरान ली गई इस तस्वीर में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, ग़ुलाम नबी आज़ाद और सीपीआई (मार्क्सवादी) के नेता सीताराम येचुरी दिख रहे हैं. संभवतः सोशल मीडिया की दुनिया में कहीं इसे लेकर भी दावा किया जा रहा हो कि यह उसी घटना की तस्वीर है जिसके बाद प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस से ‘आज़ाद’ होने का फ़ैसला किया था.

लेकिन यहां उसी समय की एक दूसरी तस्वीर है जिसमें सोनिया गांधी प्रणब मुखर्जी का हाथ जोड़कर अभिवादन कर रही हैं. सोशल मीडिया पर जो तस्वीर वायरल है, हो सकता है उसके मामले में भी ऐसा ही हो. शायद सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति का अभिवादन किया हो, लेकिन उस पल की तस्वीर न खिंच पाई हो. यहां एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिन दो तस्वीरों में सोनिया गांधी अभिवादन नहीं कर रही हैं, उनमें प्रणब मुखर्जी भी सोनिया गांधी की तरफ़ नहीं देख रहे हैं. वायरल तस्वीर में वे ग़ुलाम नबी आज़ाद और मणिशंकर अय्यर की तरफ़ देख रहे हैं, और ऊपर दी गई तस्वीर में वे सीताराम येचुरी को देखकर उनका अभिवादन स्वीकार कर रहे हैं.

विपक्ष के नेताओं के साथ तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अभिवादन करतीं सोनिया गांधी
विपक्ष के नेताओं के साथ तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अभिवादन करतीं सोनिया गांधी

अब सोशल मीडिया में प्रणब मुखर्जी की किसी किताब के हवाले से किए गए उस दावे पर आते हैं कि संबंधित घटना के बाद उन्होंने कांग्रेस से ‘आजाद’ होने का मन बना लिया था. यह दावा पहली नजर में ही झूठ साबित होता है. दरअसल मुखर्जी की किसी किताब में इस घटना का ज़िक्र नहीं हो सकता, क्योंकि उनकी तीनों राजनीतिक आत्मकथाओं में जिन घटनाओं का ज़िक्र है, वे सभी इस घटना से पहले की हैं. वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेजों में यह भी नहीं बताया गया है कि इस घटना का ज़िक्र उन्होंने किस किताब में किया है.

वायरल पोस्ट में जिस घटना का ज़िक्र है वह 19 नवंबर, 2016 की है. हालांकि प्रणब मुखर्जी की आख़िरी किताब ‘द कोलिशन ईयर्स’ अक्टूबर 2017 में आई थी. लेकिन वह 1996 से 2012 के बीच हुए राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित थी. बाद के सालों का उसमें कोई ज़िक्र नहीं है. वहीं, ‘द ड्रामैटिक डेकेड : द इंदिरा गांधी ईयर्स’ दिसंबर 2014 में आई थी. यह किताब भारतीय राजनीति में इंदिरा गांधी के योगदान और प्रभाव के बारे में बताती है. यह किताब वायरल मैसेज में बताई गई घटना से दो साल पहले बाज़ार में आई थी. यानी इसमें भी सोनिया गांधी से नाराज़गी वाली बात नहीं हो सकती.

उनकी एक और किताब ‘द टर्ब्युलेंट ईयर्स’ 1980 से 1996 के राजनीतिक घटनाक्रमों के बारे में है. यह किताब फ़रवरी, 2016 में आई थी, और सोनिया गांधी के कथिततौर पर प्रणब मुखर्जी का अभिवादन न करने की घटना उस साल नवंबर में हुई थी. इससे साफ़ है कि हाल के सालों की प्रणब मुखर्जी की किसी किताब में इस घटना का ज़िक्र नहीं है.

अब इस सवाल पर आते हैं कि क्या प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति रहते सोनिया गांधी उनका अभिवादन नहीं करती थीं. अगर एक तस्वीर के आधार पर यह दावा किया जा सकता है तो दस तस्वीरें दिखाकर इसे ख़ारिज भी किया जा सकता है. गूगल पर ऐसी कई तस्वीरें हैं जिनमें सोनिया गांधी और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दोनों हाथ जोड़कर एक-दूसरे का अभिवादन कर रहे हैं.

प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति रहते हुए अलग-अलग मौक़ों पर उनका हाथ जोड़कर अभिवादन करतीं सोनिया गांधी
प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति रहते हुए अलग-अलग मौक़ों पर उनका हाथ जोड़कर अभिवादन करतीं सोनिया गांधी

चलते-चलते बता दें कि वायरल मैसेज का यह दावा भी ग़लत है कि संसद में प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के बाद सोनिया गांधी ने उनका अभिवादन नहीं किया था. दरअसल वायरल तस्वीर दिल्ली स्थित विज्ञान भवन की है जहां साल 2016 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मदिन (19 नवंबर) के मौक़े पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था. उसी में भाग लेने के लिए प्रणब मुखर्जी वहां पहुंचे थे और सोनिया गांधी गुलाम नबी आजाद और मणिशंकर अय्यर के साथ वहां मौजूद थीं.