दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के आधिकारिक निवास पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों का धरना तीसरे दिन भी जारी है. इस धरने में शामिल दिल्ली के लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन के बाद अब उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है. उनकी मांग है कि उपराज्यपाल आईएएस अधिकारियों को अपनी हड़ताल खत्म करने का निर्देश दें और कामकाज रोके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें.

दिल्ली के राजनिवास के बाहर आम आदमी पार्टी (आप) जंतर-मंतर जैसा माहौल बनाना चाहती है, लेकिन न भीड़ साथ दे रही है और न ही मौसम. इसलिए उपराज्यपाल के घर के अंदर धरने पर बैठने का आप का आइडिया उल्टा पड़ता दिखने लगा है. राजनिवास के बाहर खड़े आप के एक नेता कहते हैं, ‘सर ने सोचा होगा, कुछ घंटे की बात है, ज्यादा से ज्यादा एक रात रुकना होगा. लेकिन दो रातें बीत चुकी हैं और धरना खत्म होने की उम्मीद नहीं दिखती. दिल्ली की इस भीषण गर्मी में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी समझाना मुश्किल हो जाता है कि अंदर मुख्यमंत्री और मंत्री एयर कंडीशन कमरे में सोफे पर बैठे हैं और आप बाहर चिलचिलाती धूप में बैठो’.

इस बारे में राजनिवास के करीबी एक अफसर से बात करने पर वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘घर में घुसकर दिल्ली के लेफ्टिनेंट गर्वनर को धमकाने का आइडिया न जाने किसने दिल्ली के मुख्यमंत्री को दिया. अब इससे बाहर निकलने का सिर्फ रास्ता है, मुख्यमंत्री अपनी जिद छोड़ें और कोई भी काम बताकर जल्दी से बाहर आ जाएं. उनकी मांग ही ऐसी है कि उपराज्यपाल मान नहीं सकते’.

इस अफसर ने जो कहा, उसमें कुछ हद तक सच्चाई भी है. दिल्ली सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों और दिल्ली सरकार को कवर करने वाले पत्रकारों से बात करें तो पता चलता है कि दिल्ली में आईएसएस अफसर हड़ताल पर नहीं हैं. वे तय समय पर दफ्तर आते हैं, अपना काम भी निपटाते हैं. बस मुख्यमंत्री या मंत्री के बुलाने पर नहीं जाते.

इसके पीछे अफसरों की अलग वजह है. एक आईएएस अफसर शिकायती लहजे में कहते हैं, ‘केजरीवाल बड़े-बड़े नेताओं से लिखित माफी मांग सकते हैं. लेकिन अपनी सरकार के मुख्य सचिव से अगर दो लाइन में लिखित माफी मांग लें तो सारा झगड़ा खत्म हो जाएगा. लेकिन मुख्यमंत्री ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि आईएएस अफसर नेता नहीं होते, इसलिए अफसर जो कर सकते हैं वो कर रहे हैं’.

अब सवाल है कि अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल के घर जाकर धरना देने का फैसला क्यों किया. आम आदमी पार्टी की खबर रखने वाले एक सूत्र की मानें तो इस कदम के पीछे 2019 का चुनाव है जिसकी तैयारी अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने शुरू कर दी है. अभी चुनाव दूर है लेकिन, मोदी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. राहुल गांधी धीरे-धीरे हर विरोधी पार्टी के बड़े नेता से संपर्क कर रहे हैं. लेकिन केजरीवाल के चाहने के बावजूद राहुल गांधी का फोन उनके पास नहीं आया. आम आदमी पार्टी ने कुछ पत्रकारों के जरिए यह खबर भी फैलाई थी कि दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेगी. लेकिन कांग्रेस की तरफ से अभी ऐसा फैसला नहीं हुआ है.

आप की रणनीति की खबर रखने वाले एक नेता की मानें तो अरविंद केजरीवाल चाहते हैं कि पार्टी सिर्फ 40-50 लोकसभा सीटों पर ही मजबूती से चुनाव लड़े. रणनीति यह है कि आम आदमी पार्टी 50 में से कम से कम 20 सीटें जीत सके. इसलिए केजरीवाल मोदी विरोधी गठबंधन का हिस्सा बनना चाहते हैं.

इस वक्त मोदी विरोधी गठबंधन के पैरोकार दो बड़े नेता हैं जो अलग-अलग तरीके से महागठबंधन बनाने की ताक में हैं. ये हैं राहुल गांधी और ममता बनर्जी. राहुल गांधी कांग्रेस को उन राज्यों में मजबूत कर रहे हैं जहां कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधी टक्कर है और उन राज्यों में दोस्त तलाश रहे हैं जहां भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दलों से है. दिल्ली एक ऐसा राज्य है जहां भाजपा का मुकाबला आम आदमी पार्टी से है, लेकिन कांग्रेस भी खुद को कम नहीं आंक रही. राहुल गांधी के बेहद करीब माने जाने वाले अजय माकन को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष ही इसी शर्त पर बनाया गया था कि वे दिल्ली में केजरीवाल को उखाड़कर कांग्रेस को स्थापित करेंगे. अब अगर कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से हाथ मिला लिया तो हमेशा के लिए दिल्ली में कांग्रेस तीसरे नंबर की ताकत बनकर रह जाएगी जिसके लिए अजय माकन और उनकी टीम तैयार नहीं है.

सुनी-सुनाई है कि जब अखबारों में खबर छपी कि केजरीवाल की पार्टी सीधे कांग्रेस के बड़े नेताओं से बात कर रही है तो अजय माकन ने भी राहुल गांधी के दफ्तर से संपर्क स्थापित किया था. उनसे कहा गया कि अभी कुछ महीने तक कांग्रेस और केजरीवाल के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं होगी. केजरीवाल के लिए यह एक झटके की तरह था क्योंकि आम आदमी पार्टी इस वक्त देश के दो राज्यों में ही सबसे ज्यादा मजबूत है - दिल्ली और पंजाब. पार्टी को तभी फायदा होगा जब वह कांग्रेस से गठबंधन करेगी. किसी और दल से गठबंधन तो आसानी से हो सकता है लेकिन सीटें मिलने की गारंटी नहीं मिलेगी.

राहुल मोदी विरोधी गठबंधन बना रहे हैं तो ममता बनर्जी अब भी फेडरल फ्रंट का नाम बार-बार उछालती हैं. ममता आसानी से अरविंद केजरीवाल से गठबंधन कर सकती हैं लेकिन, इससे उनको नुकसान ही होगा क्योंकि दिल्ली में ममता की पार्टी का कोई जनाधार नहीं है और केजरीवाल को गठबंधन बनाने के लिए सात में से एक सीट भी देनी पड़ेगी. पश्चिम बंगाल में आप का कोई आधार नहीं है इसलिए इसलिए ममता बनर्जी को वहां अरविंद केजरीवाल की जरूरत नहीं है.

आम आदमी पार्टी के अंदर की खबर रखने वाले एक सूत्र बताते हैं, ‘अगर पार्टी को लोकसभा में 20 सीटें मिल जाती हैं तो कम से कम पार्टी का एक बड़ा नेता केंद्र में मंत्री बन सकता है और फिर पार्टी दिल्ली-पंजाब से आगे बढ़कर पूरे देश की सियासत में भूमिका अदा कर सकती है. फिलहाल अरविंद केजरीवाल के दिमाग में कुछ ऐसा ही चल रहा है, इसलिए उन्होंने महागठबंधन के सहयोगियों पर दवाब बनाने के लिए धरने का कार्यक्रम बनाया था. उन्हें उम्मीद थी कि 24 घंटे टेलीविजन चैनलों पर खबरें चलेंगी. पूरे देश में माहौल बनेगा.’

लेकिन ऐसा हो न सका. अटल बिहारी वाजपेयी का एम्स में भर्ती होना, किम जोंग उन की ट्रंप से मुलाकात और फिर भैय्यूजी महाराज की खुदकुशी जैसी खबरें अरविंद केजरीवाल के धरने पर भारी पड़ गई हैं. अब खबर है कि आप एक बार फिर माहौल बनाने की कोशिश करेगी. सुनी-सुनाई है कि पार्टी के करीबी पत्रकारों से संपर्क साधा गया है. उनसे अरविंद केजरीवाल की खबर दिखाने की गुजारिश की गई है. दिन-दोपहरी की जगह पार्टी के कार्यकर्ताओं को शाम को बुलाया गया है. सुनी-सुनाई है कि अगर माहौल बन पाया तो ठीक, वरना केजरीवाल उपराज्यपाल के घर से अपने घर वापस लौट सकते हैं. और ऐसा करने के लिए महागठबंधन के नेताओं की तरफ से अपील जारी हो सकती है या फिर कुछ नेता सीधे उपराज्यपाल निवास जाकर केजरीवाल की घर वापसी का रास्ता बना सकते हैं.