अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अतीत में कई बार उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन को ‘बहुत काबिल व्यक्ति’ बता चुके हैं. इसी तरह वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ‘बहुत ख़ास व्यक्ति’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं. मंगलवार को सिंगापुर में ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुई बैठक के जो नतीजे सामने आये हैं उन्हें देखते हुए इन दोनों पर ट्रंप के कहे ये शब्द एकदम फिट बैठते दिख रहे हैं. इस बैठक का विश्लेषण करने वाले इसके नतीजों को शी जिनपिंग और किम जोंग-उन दोनों की ऐतिहासिक जीत की तरह बता रहे हैं.

ऐसा क्यों है इसे समझने के लिए बीते साल के डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान पर ध्यान देना जरूरी है. बीते नवंबर में चीन की यात्रा से लौटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था, ‘मेरे और शी जिनपिंग के बीच इस बात की सहमति बनी है कि हम उत्तर कोरिया से बातचीत के दौरान उस ‘फ्रीज-फॉर-फ्रीज़’ समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे जो इससे पहले भी कई बार असफल हो चुका है.’ ट्रंप के इस दावे का चीन ने तुरंत खंडन किया. चीन का कहना था कि ट्रंप और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच कोई ऐसी बात नहीं हुई है और चीन अभी भी यह मानता है कि उत्तर कोरिया से बातचीत के दौरान ‘फ्रीज-फॉर-फ्रीज’ की नीति ही सबसे कारगर साबित होगी.

‘फ्रीज-फॉर-फ्रीज़’ नीति का मतलब है कि वार्ता कर रहे दोनों पक्षों को एक-एक कदम पीछे हटाने पर सहमत होना पड़ेगा. लेकिन, अमेरिका का शुरू से ही कहना है कि वह अपना कदम पीछे नहीं हटाएगा, यानी वह तब तक उत्तर कोरिया को कोई सहूलियत नहीं देगा जब तक कि वह अपने परमाणु हथियारों को पूरी तरह से खत्म नहीं कर देता. इसी साल जनवरी में तत्कालीन विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने भी कहा था कि ट्रंप प्रशासन ‘फ्रीज-फॉर-फ्रीज’ नीति पर नहीं चलेगा. टिलरसन का कहना था, ‘परमाणु निरस्त्रीकरण के बाद ही उत्तर कोरिया को किसी तरह की रियायत दी जाएगी.’

लेकिन, मंगलवार को सिंगापुर में हुई बैठक में डोनाल्ड ट्रंप ने ‘फ्रीज-फ़ॉर-फ्रीज़’ की नीति पर चलते हुए ही उत्तर कोरिया से समझौता किया. उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के वार्षिक सैन्याभ्यास को स्थगित करने की बात कहकर सभी को चौंका दिया. यह हैरानी इसलिए भी थी कि इस बैठक में उत्तर कोरिया से कोई ठोस आश्वासन लिए बिना ही ट्रंप ने उसे यह रियायत दे दी. असल में उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायदीप को परमाणु मुक्त बनाने की बात तो कही है लेकिन, यह एक मोटी-मोटी और आम बात है जो वह बीते कुछ समय में कई बार कर चुका है. वह कब तक और कैसे अपने परमाणु हथियार नष्ट करेगा, इसकी उसने कोई रूपरेखा स्पष्ट नहीं की है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रेस वार्ता के दौरान जो बातें कहीं उनसे भी कइयों को काफी हैरानी हुई है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वार्षिक सैन्याभ्यास को स्थगित करने के अलावा वे जल्द ही दक्षिण कोरिया में तैनात अपने 32000 सैनिकों को भी वापस बुलाने पर विचार करेंगे. डोनाल्ड ट्रंप के बयान और मंगलवार की बैठक के बाद दुनिया भर के कई विशेषज्ञों का कहना है कि भले ट्रंप और किम जोंग की बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला हो. लेकिन, इस पहली बैठक से सबसे ज्यादा फायदा चीन को होता दिख रहा है.

सीबीएस न्यूज़ के विदेश मामलों के सलाहकार इयान ब्रेमर कहते हैं कि इस बैठक में जिस तरह से चीजें घटी हैं उसमें चीन की बड़ी भूमिका नजर आती है. वे इस बैठक का असली विजेता चीन को बताते हुए कहते हैं, ‘अमेरिका और उत्तरी कोरिया के बीच “फ्रीज-फॉर-फ्रीज” नीति पर ही बात हुई है. देखा जाए तो यहां दोनों एक-एक कदम पीछे हटे हैं. उत्तर कोरिया मिसाइल और परमाणु परीक्षण न करने पर सहमत हुआ है तो वहीं अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास से पीछे हटा है. यह वही नीति है जिसके लिए चीन वर्षों से लामबंदी करने में लगा हुआ था और अमेरिका इसे न मानने की बात कहता था.’

जानकार कुछ और बातों की ओर भी ध्यान दिलाते हैं जिनसे भी चीजें चीन के हक़ में जाती हुई दिखती हैं. ये लोग कहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भले ही उत्तर कोरिया पर से प्रतिबंध न हटाए हों लेकिन, मंगलवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध न लगाने की बात कही. साथ ही उन्होंने माना कि चीन ने पिछले कुछ समय से उत्तर कोरिया को लेकर प्रतिबंधों में ढील दी है, फिर भी वे इसमें कुछ नहीं कर सकते. जानकारों की मानें तो इसी वजह से चीन के हौसले और ज्यादा बुलंद हो गए और चीन ने इस बैठक के तुरंत बाद ही संयुक्त राष्ट्र से उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की मांग कर दी.

अमेरिकी अधिकारी, दक्षिण कोरिया और जापान ट्रंप के फैसले से हैरान

जहां इस बैठक में डोनाल्ड ट्रंप के रुख ने चीन और उत्तर कोरिया को खुश कर दिया वहीं इससे अमेरिकी अधिकारी और सहयोगी देश हैरान और चिंतित हैं. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्धाभ्यास स्थगित करने से पहले इस बारे में न तो पेंटागन और न ही अपने सहयोगी देश दक्षिण कोरिया और जापान के साथ कोई मशविरा किया. यही कारण था कि जब उन्होंने यह घोषणा की तो सभी हैरान रह गए.

अमेरिका की सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेनिफर लवेट का कहना था कि उन्हें इस युद्धभ्यास को स्थगित करने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. अमेरिकी थिंक टैंक सीएसआईएस में एशिया और जापान मामलों के जानकार माइकल ग्रीन एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति ने पहले तो अपने सहयोगी जापान और दक्षिण कोरिया से बिना पूछे सैन्याभ्यास खत्म करने की एकतरफा घोषणा कर दी और फिर यह भी कह दिया कि जल्द ही वे अपने सैनिकों को एशिया से वापस बुला लेंगे....इसने हम सभी को बहुत ज्यादा चौंका दिया है.’

उधर, दक्षिण कोरियाई मीडिया का कहना है कि ट्रंप उत्तर कोरिया से बिना कोई आश्वासन लिए कैसे इतनी जल्दी उसे रियायतें दे सकते हैं. ट्रंप के इस फैसले पर दक्षिण कोरियाई सरकार के प्रवक्ता का कहना था, ‘हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा क्यों कहा है और इसका असल मकसद क्या है.’

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले की जमकर आलोचना भी हो रही है. रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर और अमेरिकी एयर फ़ोर्स के पूर्व अधिकारी लिंडसे ग्राहम एक अखबार से बातचीत में कहते हैं. ‘चीन उत्तर कोरिया के माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप को अपने मन मुताबिक चला रहा है. चीन का हमेशा से लक्ष्य अमेरिका को एशिया से बाहर करना रहा है जिससे वह उस पूरे क्षेत्र में चीजों को अपने हिसाब से तय कर सके. ट्रंप ने उसकी मन चाही मुराद पूरी कर दी. दक्षिण कोरिया में हमारी सेना की तैनाती एशिया को स्थिर करने के लिए है.’

अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति जोए बिडन सीएनएन से बातचीत में कहते हैं, ‘डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को बहुत कुछ दे दिया, लेकिन बदले में कुछ नहीं लिया. इस बैठक के बाद उत्तर कोरिया पर दबाव की रणनीति कमजोर हुई है, हमारे सहयोगी देशों की सुरक्षा चिंता बढ़ी है और बदले में अस्पष्ट वादे मिले हैं.’

इस बैठक के नतीजों का विश्लेषण अगर डोनाल्ड ट्रंप के शब्दों में करें तो ‘बहुत काबिल’ किम जोंग उन की काबिलियत इस बैठक में साफ नजर आती है. ट्रंप के ‘बेहद खास व्यक्ति’ का प्रभाव भी इस बैठक में दिखा. लेकिन, अगर इस बैठक से किसी की छवि पर धूल की परत जमी है तो वे सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्हें पेरिस जलवायु समझौते और ईरान डील जैसे कई मुद्दों के बाद से एक निर्णायक नेता के रूप में जाना जाने लगा था.

शायद ट्रंप भी इस बात को समझते हैं. इसीलिए बैठक के बाद उनका कहना था, ‘मुझे लगता है वे (किम जोंग उन) करेंगे. लेकिन, हो सकता है कि कल को मैं गलत साबित हो जाऊं और आपके सामने आकर कहूं कि तब मैं गलत था.’

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