यह पिछले हफ्ते की ही बात है जब न्यूयॉर्क के सेलिब्रिटी शेफ, लेखक और टीवी होस्ट एंथनी बोर्डेन की आत्महत्या की खबर आई थी. इसके बाद 12 जून को आध्यात्मिक गुरू भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. भले ही ये दोनों उदाहरण अपने कामकाजी क्षेत्र की वजह से ओरछोर के लगें लेकिन इनमें सबसे बड़ी समानता यह थी कि ये दोनों असाधारण रूप से एक सफल जीवन जी रहे थे.

इन घटनाओं का चौंकाने वाला पक्ष इस सवाल से जुड़ा है कि जब किसी व्यक्ति के पास ‘सबकुछ’ है तो वह आत्महत्या क्यों करता है? दरअसल आत्महत्या की सीधी कोई वजह नहीं होती. यह तनाव, अवसाद या मानसिक स्वास्थ्य गड़बड़ाने का नतीजा होती है और इसलिए इन स्थितियों को लेकर आज बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है.

आत्महत्या के पहले तक देखें तो भय्यूजी महाराज एक सफल जीवन जी रहे थे. मॉडल से गुरू बने भय्यूजी के महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बड़ी तादाद में अनुयायी थे और इनमें अलग-अलग पार्टियों से जुड़े नेता भी शामिल थे.

महाराज 2011 में राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए जब उन्होंने लोकपाल के मुद्दे पर जारी अन्ना हजारे का अनशन खत्म करवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. अभी दो महीने पहले ही मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि इस तरह का प्रभाव रखने वाले भय्यूजी महाराज ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि वे तनाव से बहुत परेशान हो चुके थे. बोर्डेन के एक दोस्त का भी यही कहना है कि न्यूयॉर्क का यह शेफ अवसाद से गुजर रहा था और आखिर में यह बीमारी जीत गई.

आत्महत्या एक खतरनाक विकल्प है, लेकिन साथ ही यह एक व्यक्ति की मर्जी का भी मामला है. आज हम धीरे-धीरे आत्महत्या को लेकर आधुनिक नजरिया अपना रहे हैं और अब इसे अपराध की तरह नहीं देखते. हालांकि किसी को ‘आत्महत्या के लिए उकसाना’ कानून की किताबों के मुताबिक एक अपराध है. यह ऐसा आरोप है जिसकी लोग अपने-अपने हिसाब से व्याख्या कर सकते हैं और कई बार इसकी आड़ में निर्दोष लोगों को परेशान भी किया जाता है.

बतौर देश-समाज हम आत्महत्या जैसी त्रासद घटना की जवाबदेही तय करने के लिए कानूनी पक्षों पर ज्यादा उलझे रहते हैं. लेकिन इसके साथ हमारी जिम्मेदारी यह भी होनी चाहिए कि हम अवसाद और तनाव जैसी आम बीमारियों के इलाज और इनको लेकर जागरूकता के लिए ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें. और यह इसलिए क्योंकि आखिरकार आत्महत्या इन्हीं स्थितियों का नतीजा होती है. (स्रोत)