कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी 2019 के लोक सभा चुनाव के लिहाज़ से सभी विपक्षी दलों को एकजुट करना चाहते हैं. इस एकजुटता को वे समय की मांग बता चुके हैं. अपनी तरफ से इस दिशा में वे हरसंभव कोशिश भी कर रहे हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो उनकी कोशिशें परवान नहीं चढ़ पा रही हैं क्योंकि विपक्ष के कई दलों का असहयोगी रवैया उनकी कोशिशों के आड़े आ रहा है.

ख़बरों के मुताबिक बुधवार काे राहुल गांधी द्वारा आयोजित इफ़्तार पार्टी से कई विपक्षी दलों के प्रमुखों की अनुपस्थिति इस बात की मिसाल थी कि अभी विपक्षी महागठबंधन की राह आसान नहीं है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इफ़्तार पार्टी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), समाजवादी पार्टी (एसपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और यहां तक कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख नेता भी नहीं आए. टीएमसी ने पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को भेज दिया तो बीएसपी ने सतीश चंद्र मिश्रा को. आरजेडी की तरफ़ से मनोज झा पहुंचे तो डीएमके की ओर से कणिमोझी.

कर्नाटक में अभी-अभी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले जनता दल-धर्मनिरपेक्ष (जेडीएस) ने भी दानिश अली को भेजा. जबकि एनसीपी का प्रतिनिधित्व डीपी त्रिपाठी कर रहे थे.अखिलेश यादव की एसपी की ओर से तो कोई आया ही नहीं. सूत्रों से जब इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘रामगोपाल यादव आने वाले थे लेकिन वे ट्रैफिक में फंस गए. इसलिए नहीं आ पाए.’ अलबत्ता पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मौज़ूदगी ज़रूर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए राहत की बात रही. वह इसलिए क्योंकि हाल में ही मुखर्जी के आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कार्यक्रम में जाने के बाद तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं.

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील व उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी भी थे. साथ ही प्रमुख कांग्रेसी नेताओं सहित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रमुख सीताराम येचुरी भी. लेकिन इन लोगों की उपस्थिति से ज़्यादा चर्चा उनकी रही जो नहीं आए क्योंकि उन विपक्षी नेताओं के न आने की बड़ी वज़ह यह मानी जा रही है कि वे राहुल गांधी को अब भी अपना नेता मानने को तैयार नहीं हैं. द एशियन एज़ के मुताबिक राहुल गांधी ने भी अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किसी और नेता की अगुवाई में विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार हैं या फिर ख़ुद ही उसका नेतृत्व करना चाहेंगे. यही वज़ह है कि विपक्ष के बड़े नेता राहुल गांधी के आयोजनों से दूरी बनाए हुए हैं.