उत्तर प्रदेश में सहारनपुर की एक उपभोक्ता अदालत ने रेलवे पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक यह जुर्माना एक यात्री को यात्रा की तय तारीख से एक हजार साल आगे का टिकट जारी करने पर लगाया गया है. अदालत ने रेलवे को विष्णुकांत शुक्ला नाम के इस यात्री को तीन हजार रु का मुआवजा देने को भी कहा है.

19 नवंबर 2013 को विष्णुकांत शुक्ला हिमगिरि एक्सप्रेस के जरिये सहारनपुर से जौनपुर की यात्रा कर रहे थे. यात्रा के दौरान टिकट निरीक्षक (टीटीई) ने पाया कि उनके टिकट पर यात्रा का वर्ष 2013 के बजाय 3013 छपा हुआ है. इसके बाद उसने विष्णुकांत शुक्ला पर आठ सौ रुपये का जुर्माना लगाने के बाद उन्हें मुरादाबाद स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया.

अखबार के मुताबिक विष्णुकांत शुक्ला का कहना है, ‘वह यात्रा मेरे लिए बेहद आवश्यक थी क्योंकि जौनपुर में मेरे एक मित्र की पत्नी का देहांत हो गया था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं एक डिग्री कॉलेज में हिंदी विषय के विभागाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुआ हूं. फर्जी टिकट के जरिये यात्रा करने के बारे में सोच भी नहीं सकता. मैंने कुछ गलत नहीं किया था. इसीलिए यात्रा समाप्त होने के बाद न्याय पाने के लिए मैंने उपभोक्ता अदालत की शरण ली.

पांच साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद बीते मंगलवार को अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया. अदालत ने कहा, ‘इस पूरे मामले में रेल विभाग की तरफ से लापरवाही और सेवाओं में कमी का अभाव दिखता है. बुजुर्ग को यात्रा के दौरान ट्रेन से उतारे जाने के चलते उन्हें शारीरिक और मा​नसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा होगा.’ इन बातों को देखते हुए अदालत ने रेलवे पर जुर्माना लगाने के साथ यात्री को मानसिक पीड़ा पहुंचाने के लिए तीन हजार रुपये का अतिरिक्त हर्जाना चुकाने के आदेश दिए. उधर, रेलवे अधिकारियों ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.