दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के आधिकारिक निवास पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों का धरना चौथे दिन भी जारी है. इसके अलावा इस धरने में शामिल लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन की भूख हड़ताल को तीन और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की भूख हड़ताल को दो दिन हो चुके हैं. इन लोगों ने सोमवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल पर आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने की मांग को अनसुना करने का आरोप लगाते हुए धरना शुरू कर दिया था.

गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली के आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने की अपील की है. उन्होंने लिखा, ‘पिछले तीन महीनों से दिल्ली के आईएएस अधिकारी हड़ताल पर हैं. उन्होंने मंत्रियों की सभी बैठकों में आना बंद कर दिया है.’ अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि दिल्ली के आईएएस अफसरों पर सीधे-सीधे उपराज्यपाल और केंद्र का नियंत्रण है, इसलिए दिल्ली सरकार उनकी हड़ताल नहीं खत्म करवा पा रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, ‘बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उपराज्यपाल साहब इनकी हड़ताल खत्म नहीं करवा रहे हैं, इसलिए दिल्ली सरकार और दिल्ली के लोग आपसे हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे हैं कि आप तुरंत इनकी हड़ताल खत्म करवाएं ताकि दिल्ली के काम फिर से शुरू हो सकें. ’

इस बीच तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) जैसे क्षेत्रीय दलों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के धरने का समर्थन किया है और केंद्र से संकट का जल्द हल निकालने की भी अपील की है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ट्विटर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा कि निर्वाचित मुख्यमंत्री का सम्मान किया जाना चाहिए. रालोद नेता जयंत चौधरी ने दिल्ली के हालात को प्रशासनिक विफलता बताया है. वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि तानाशाही केंद्र ने दिल्ली और पुडुचेरी में लोकतंत्र का तमाशा बना दिया है. इसके अलावा भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री होते तो वे गृह मंत्रालय को निर्वाचित मुख्यमंत्री से बात करने का आदेश दे चुके होते.