एयर इंडिया में 76 फीसदी रणनीतिक हिस्सेदारी का कोई खरीदार न मिलने के बाद अब सरकार इस विमानन कंपनी का इनीशियल पब्लिक आॅफर (आईपीओ) लाने पर विचार कर रही है. द टाइम्स आॅफ इंडिया ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि कर्ज में डूबी एयर इंडिया को उबारने के लिए सरकार कई संभावनाओं पर विचार कर रही है. शेयर बाजार में इसे सूचीबद्ध कराना भी इन्हीं में एक विकल्प है. ऐसा होने से कंपनी को वित्तीय संकट का समाधान मिल जाएगा. साथ ही इस पर सरकार का स्वामित्व भी बरकरार रहेगा.

जून 2017 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने एयर इंडिया में विनिवेश की मंजूरी दी थी. इसके बाद इसी साल मार्च में इसकी 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला हुआ था. एयर इंडिया में बोली लगाने की आखिरी तारीख 15 मई निर्धारित की गई थी जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मई कर दिया गया था. शुरुआत में इंडिगो, जेट एयरवेज के अलावा विस्तारा जैसी कं​पनियों ने एयर इंडिया में निवेश के प्रति दिलचस्पी दिखाई थी. पर बाद में उन्होंने अपना विचार बदल दिया था. और फिर आखिरी तारीख तक सरकार को एयर इंडिया का कोई खरीदार नहीं मिल पाया था.

बताया जाता है कि एक अन्य घरेलू विमानन कंपनी इंडियन एयरलाइंस का एयर इंडिया में विलय किए जाने के बाद साल 2007 से यह सरकारी विमानन कंपनी लगातार घाटे में चल रही है. इस पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है. कंपनी को इससे मुक्ति दिलाने के लिए ही इसमें विनिवेश और इसकी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया गया ​था. हालांकि एयर इंडिया के कर्मचारी संगठन विनिवेश के फैसले का विरोध करते हुए पहले ही आईपीओ लाने की मांग कर चुके हैं. साथ ही उनका कहना है कि कंपनी में कुशल प्रबंधन की नियुक्ति और इस नौकरशाही से मुक्ति दिलाकर इसका कायाकल्प किया जा सकता है.