दिल्ली सहित उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से तीन दिन से धूल भरी हवा की चपेट में हैं. खबरों में वायु प्रदूषण की इस स्थिति को स्वास्थ्य के लिहाज से काफी खतरनाक बताया जा रहा है और इस पर सोशल मीडिया में भी लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. अरबिंदा पढी का टवीट है, ‘दिल्ली में हवा की गुणवत्ता जान ले रही है... जीने के अधिकार (जो संविधान में मौजूद है) की तरह लोगों को स्वच्छ हवा का अधिकार भी हासिल होना चाहिए...’

ट्विटर और फेसबुक पर खासकर दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति को लेकर ज्यादा चर्चा है और यहां इसी हवाले से केंद्र की भाजपा सरकार और दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना भी की गई है. वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान की टिप्पणी है, ‘दिल्ली में धूल का स्तर इतना गंभीर हो चुका है कि ऐसा लगता रहा है जैसे आप इसे निगल रहे हों... अगर यह आपातकालीन स्थिति नहीं है तो फिर क्या है! वहीं राजधानी में प्रशासन के पंगु होने से हालात और खराब हो रहे हैं.’

इस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने तीन मंत्रियों के साथ उपराज्यपाल के आवास पर धरना दे रहे हैं. वायु प्रदूषण से जुड़ी कई प्रतिक्रियाओं में इस बात के जिक्र के साथ केजरीवाल को निशाने पर लिया गया है. ट्विटर हैंडल @MadhuTripat14 पर तंजभरी टिप्पणी है, ‘दिल्ली की जनता धूल के चैंबर में, धरनावाल सोफे पर एलजी के एसी चैंबर में!’ इस स्थिति के बहाने से यहां लोगों ने दूसरे राजनीतिक दलों और नेताओं के खिलाफ भी चुटकियां ली हैं. एक ट्विटर यूज़र ने लिखा है, ‘पूरे उत्तर भारत में अच्छे दिन आ गए हैं, लेकिन धूल के कारण दिख नहीं रहे.’

दिल्ली सहित करीब-करीब पूरे उत्तर भारत में धूल भरी हवा चलने से फैले प्रदूषण पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

आशुतोष उज्जवल | facebook/ashutosh7570

दिल्ली एनसीआर में इतनी धूल है कि बस ऊंटों की सैर होने लगे तो पूरा जैसलमेर हो जाए!

विक्रम चंद्रा | @vikramchandra

धूल भरी आंधी ने दिल्ली में सूरज को सफेद कर दिया है!

कीर्तीश भट्ट | @Kirtishbhat

दिल्ली की हवा में अभी इतनी डस्ट है कि घर जाकर सोचना पड़ता है, नहा लें या वेक्यूम क्लीनर से साफ कर लें.

देव रतन | @ratan_sadh 4h4 hours ago

रोज नई मुश्किलें खड़ी करते हैं मोदी... अब राजस्थान की भाजपा सरकार ने मोदी के दबाव में आकर दिल्ली वालों को परेशान करने के लिए धूल भरी आंधी छोड़ दी है.

आशीष प्रदीप | facebook/ruritania

समझ नहीं आ रहा, दिल्ली में धूल ज्यादा है या धूल झोंकने वाले!