लगभग 20 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदे से जुड़े एक मामले में दो बड़े कॉरपोरेट समूहों के बीच झगड़े का ख़ुलासा हुआ है. आलम ये है कि इन दोनों समूहों के बीच लड़ाई की वज़ह से यह अहम रक्षा सौदा भी अटक गया है. इनमें एक समूह अनिल अंबानी नेतृत्व वाला है. दूसरा- लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी). बताया जाता है कि इनमें से अनिल अंबानी के समूह की कंपनी- आरएनईएल (रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड) ने तो बाक़ायदा इस मामले में एलएंडटी के ख़िलाफ़ रक्षा मंत्रालय को शिकायती पत्र भी लिख भेजा है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत दोनों ही कंपनियां यह सौदा हासिल करना चाहती हैं. इनमें से जिस कंपनी को भी अंतिम तौर पर ठेका मिलेगा वह चार युद्धपोत बनाकर नौसेना को देगी. ये युद्धपोत ऐसे होंगे जिनका पानी और ज़मीन दोनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा. नौसेना को ऐसे युद्धपोतों की तुरंत ज़रूरत भी है. हालांकि दोनों कंपनियों के बीच विवाद सामने आने के बाद इस सौदे की प्रक्रिया अटक गई है.

सूत्रों के मुताबिक आरएनईएल ने अपने शिकायती पत्र में रक्षा मंत्रालय को बताया है कि नौसेना के एक अतिवरिष्ठ अधिकारी का बेटा एलएंडटी की रक्षा शाखा में कार्यरत है. इसी आधार पर सौदे की प्रक्रिया से जुड़ी अंदरूनी सूचनाएं एलएंडटी को मुहैया कराई जा रही हैं. अन्य तरीकों से भी पक्षपात किया जा रहा है. कोशिश यह की जा रही है कि यह अनुबंध किसी तरह एलएंडटी काे हासिल हो जाए. ख़बर है कि इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने मामले की अंदरूनी जांच शुरू कर दी है.

अख़बार ने इस बाबत आरएनईएल से प्रतिक्रिया चाही तो कंपनी के प्रवक्ता ने माना, ‘हां, हमने इस मामले में आधिकारिक तौर पर शिकायत की है.’ हालांकि इसके अलावा उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया. वहीं एलएंडटी के प्रवक्ता का कहना था, ‘हमारी कंपनी इस तरह के किसी कृत्य में शामिल नहीं होती. हमारी कंपनी के मूल्य और सिद्धांत ऐसे अनैतिक कृत्यों की इजाज़त नहीं देते.’ जबकि नौसेना की तरफ से इस मामले में अख़बार को किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी गई.