जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली की उम्मीद में रमज़ान महीने के दौरान संघर्ष विराम लागू किया गया था. मगर इस पवित्र माह में भी आतंकियों ने अपनी हरक़तें बंद नहीं कीं. उनकी गतिविधियां पहले ही तरह ही जारी रहीं. बल्कि हाल में ही कश्मीर के अग्रणी अख़बार ‘राइज़िंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की हत्या कर उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों को सीधी चुनौती दी है. इसके साथ ख़बर यह भी है कि आतंकी अमरनाथ यात्रा को भी निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार 28 जून से वार्षिक अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है. इस यात्रा के मद्देनज़र सुरक्षा सहित सभी इंतज़ाम पूरे हो चुके हैं. लेकिन इस बीच ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से ख़बर आई है कि आतंकी अमरनाथ यात्रा को निशाना बना सकते हैं. ठीक वैसे ही जैसे 2017 में बनाया था. उस वक़्त अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में सात यात्री मारे गए थे और लगभग 19 घायल हो गए थे. बताया जाता है कि इन सूचनाओं के बाद एक उच्चस्तरीय बैठक में जम्मू-कश्मीर की स्थिति की समीक्षा की गई है. इस बैठक में यह भी सामने आया है कि आतंकी सुरक्षा बलों को चकमा देने के लिए कोई नायाब तरीका इस्तेमाल कर सकते हैं.

दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर हुई इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित, सेना,अर्धसैनिक बलों और ख़ुफ़िया एजेंसियों के बड़े अधिकारी मौज़ूद थे. सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में ज्यादातर पक्षों का मानना था कि शनिवार को रमज़ान का महीना पूरा होने के बाद संघर्ष विराम की अवधि नहीं बढ़ाई जानी चाहिए. द इंडियन एकसप्रेस की ख़बर से भी ऐसा ही संकेत मिलता है. इस अख़बार से बातचीत में एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘संघर्ष विराम सिर्फ़ रमज़ान तक के लिए था. वह भी एकपक्षीय यानी सिर्फ़ हमारी तरफ से. ईद के साथ ही यह अवधि पूरी हो रही है. इसके अब और बढ़ाए जाने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए.

नाम न छापने की शर्त पर ये अधिकारी कहते हैं, ‘जल्द ही अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है. उस पर आतंकी हमले के ख़तरे को देखते हुए हम अपने सुरक्षा बलों के हाथ बांधकर नहीं रख सकते. ऐसे में ईद के बाद आतंकियों के ख़िलाफ़ अभियान तेज होने की उम्मीद की जानी चाहिए न कि संघर्ष विराम बहाली की.’ ख़बरों के मुताबिक इस बीच भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती सहित अन्य पक्षों से मिलकर हालात की समीक्षा भी कर रहे हैं.