हो सकता है कि आपने नेटफ्लिक्स पर कोलंबिया के कुख्यात ड्रग डीलर पाब्लो एस्कोबार की जिंदगी पर आधारित सीरीज ‘नार्कोस’ देखी हो. पाब्लो की दौलत के बारे में कहा जाता है कि उसकी टीम के लोगों को नोटों की गड्डियां बांधने के लिए हफ्ते में हजार डॉलर (तकरीबन सत्तर हजार रुपये) के रबर बैंड की जरूरत पड़ती थी.

यह हैरत भरा है लेकिन, कोलंबिया को जादुई यथार्थ का देश यूं ही नहीं कहा जाता. महान लेखक गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज कहते थे कि दक्षिण अमेरिकी देशों का यथार्थ ही ऐसा होता है कि बाकी दुनिया को वह जादू जैसा दिखता है. ड्रग माफिया पाब्लो के लिए भी फुटबॉल किसी जादू से कम नहीं था. आज कोलंबिया का फुटबॉल दुनिया में जो हैसियत रखता है, उसके पीछे एस्कोबार के पैसे का भी बड़ा हाथ है. उसका रसूख और फुटबॉल लिए दीवानापन इस कदर था कि दिग्गज डिएगो माराडोना उसके बुलावे पर उसके लिए बनी एक आरामदायक जेल में फुटबॉल खेलने गए थे.

फुटबॉल उसके लिए गरीबी भुलाने का जरिया भर न था

पाब्लो एस्कोबार का जन्म एक किसान पिता और स्कूल टीचर मां के यहां 1949 में हुआ. कोलंबिया के दूसरे सबसे बड़े शहर मेडेलिन में उसका बचपन बेहद गरीबी में बीता. उसे स्कूल से इसलिए लौटना पड़ता था कि उसके पास जूते नहीं थे. अपनी राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पाब्लो को अधूरी छोड़नी पड़ी क्योंकि वह कॉलेज की फीस नहीं जमा कर पाया. कोलंबिया जैसे देश में कहा जाता था कि फुटबॉल गरीबी और दरिद्रता से बचने के लिए कुछ देर का पलायन था. पाब्लो एस्कोबार की फुटबॉल में दिलचस्पी इसी का नतीजा थी.

पाब्लो ने गरीबी से किसी भी कीमत पर मुक्त होने की सोच ली थी. उसने कार चोरी शुरू कर दी. इसके बाद प्रतिबंधित सिगरेट और लॉटरी टिकट बेचते-बेचते पाब्लो ने मेडेलिन में एक एक्सक्यूटिव का अपहरण किया और एक लाख डॉलर की फिरौती वसूली. यहीं से उसकी मेडेलिन के कुख्यात ड्रग कारोबार में एंट्री हुई. शहर के एक बड़े माफिया से उसने कोकीन की डील तय की और उसी मुलाकात में उसने उस माफिया को कत्ल कर दिया. उसके बाद कोलंबिया का ड्रग रैकेट पाब्लो के इर्द-गिर्द घूमने लगा. मेडेलिन कार्टेल को उसने दुनिया का सबसे सफल आपराधिक संस्थान बना दिया. 70 का दशक पाब्लो का था. उसे किंग ऑफ कोकीन कहा जाना लगा था.

पाब्लो के भाई राबर्तो एस्कोबार की किताब ‘द अकॉउंटेंट्स स्टोरी’ के मुताबिक मेडेलिन कार्टेल एक दिन में 15 टन कोकीन की तस्करी करता था. इससे आने वाले पैसे को रखना एक बड़ी समस्या थी. एस्कोबार के आदमी इन पैसों को जमीन में गड्ढे खोदकर गाड़ते थे. ‘द अकॉउंटेंट्स स्टोरी’ के मुताबिक कमरों में बंद नोटों की गड्डियों में दस फीसद को तो चूहे कुतर डालते थे.

दुनिया का सातवां सबसे अमीर आदमी

कोलंबिया के इस ड्रग डीलर के लिए गरीबी भूल जाने का एक मात्र जरिया अब सिर्फ फुटबॉल नहीं था. लेकिन फुटबॉल से उसका लगाव बरकरार था. ईएसपीएन के लिए बनी एक डॉक्यूमेंट्री ‘टू एस्कोबार्स’ में उसके रिश्तेदार बताते हैं कि वह एक अच्छा राइट फुटर (दाहिने पैर से खेलने वाला) था और पैसे आने पर उसने सबसे पहले फुटबॉल शूज खरीदे थे. अमेरिका के फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में पाब्लो एस्कोबार की ड्रग तस्करी इतनी बढ़ गई थी कि 1989 में फोर्ब्स पत्रिका ने उसे दुनिया का सातवां सबसे अमीर आदमी बताया. कोलंबियाई गृह युद्ध ने उसे अपना ऐसा साम्राज्य बनाने का मौका दिया कि वह सरकार से भी ज्यादा ताकतवर हो गया.

कोलंबिया के तत्कालीन भ्रष्टाचार ने पाब्लो एस्कोबार का काम और आसान किया. उसका सूत्र वाक्य था - प्लाटा ओ प्लोमो यानी पैसे ले लो या गोली खाओ. हवाई जहाज के पायलटों को मोटी रकम देकर करवाई जाने वाली कोकीन तस्करी ने पाब्लो को बेशुमार दौलत का मालिक बना दिया. किस्सा कितना सच है पता नहीं पर कहा जाता है कि एक बार सफर के दौरान सर्दी से बचने का कोई उपाय न सूझने पर उसने 13 करोड़ रुपये की गड्डियों को आग लगा दी थी.

फुटबॉल कालाधन सफेद करने का जरिया

जैसा कि होता है, पाब्लो एस्कोबार की भी कोलंबिया में रॉबिनहुड जैसी छवि बन गई थी. आज भी कोलंबिया में बिकने वाले स्टीकरों में सबसे ज्यादा पाब्लो के स्टीकर बिकते हैं. पाब्लो ने भी अपनी छवि गरीबों की मदद करने वाली बनाई. उसने अपने पैसे से आवासीय योजनाएं चलाईं. चर्च बनवाये. लेकिन उसका सबसे पसंदीदा काम था फुटबॉल के लिए लोगों की मदद करना. मेडेलिन की झुग्गियों में उसने सैकड़ों फुटबॉल के मैदान बनवाये और गरीब लड़कों को फुटबॉल की किट उपलब्ध कराई. पाब्लो द्वारा आयोजित स्लम टूर्नामेंट्स ने कोलंबिया के फुटबॉल ढांचे को सुधारना शुरू कर दिया. एलेक्सिस गार्सिया, सेरेना , रेने हिगुइता जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी झोपड़पट्टियों के इन्हीं मैदानों से निकले.

लेकिन इन लोकोपकारी चीजों के अलावा पाब्लो एस्कोबार के सामने समस्या थी कि इस अकूत पैसे का क्या किया जाए. इसके चलते उसने क्लब फुटबॉल में अपना पैसा लगाना शुरू किया. सबसे पहले उसने मशहूर एटिलिटिको नेशनल में निवेश किया. 1987 से 90 तक एटिलिटिको नेशनल के मैनेजर रहे मातुराना एक इंटरव्यू में कहते हैं, ‘क्लब के पास पैसे नहीं थे. कोलंबिया के खिलाड़ियों को पैसे देना मुश्किल था.लेकिन ड्रग कारोबार से आये पैसे से हम विदेशी खिलाड़ियों से अनुबंध कर सके. लोग कहते थे कि इन सब के पीछे एस्कोबार है, लेकिन कोई साबित न कर सका.’

पाब्लो के भाई रॉबर्तो एस्कोबार भी मानते हैं कि फुटबॉल में निवेश मनी लॉन्ड्रिंग का अच्छा जरिया था. पाब्लो ने नेशनल के प्रतिद्वंदी क्लब डीआईएम में भी जमकर निवेश किया. इस चीज ने असर किया और पाब्लो एस्कोबार के प्रतिद्वंदी रोड्रिग्ज जैसे माफिया भी फुटबॉल में पैसा लगाने लगे. इस तरह कोलंबिया में नार्को फुटबॉल की शुरुआत हुई. इसे नार्को फुटबॉल इसलिए कहा गया क्योंकि इसमें नारकोटिक्स पदार्थों की तस्करी से आया पैसा लगा था. अपनी ड्रीम टीम चुनकर पाब्लो के घर पर फैंटेसी फुटबॉल की शुरुआत ने भी खिलाड़ियों को मालामाल कर दिया.

लेकिन ड्रग्स के धंधे से आया यह पैसा एक अनचाहा मगर अवश्यंभावी नतीजा लेकर भी आया. उसने फुटबॉल को हिंसा से भर दिया. गलत फैसले या रेफरी के दूसरी टीम से पैसे लेने की बात पर कई रेफरियों का कत्ल कर दिया गया. लेकिन इस सबके बाद भी फुटबॉल में आ रहे पैसे ने कोलंबिया में फुटबॉल का एक सशक्त ढांचा खड़ा कर दिया.

जब माराडोना पाब्लो के बुलावे पर खेले

पाब्लो एस्कोबार की सबसे बड़ी चिंता थी कि सरकार उसका अमेरिका प्रत्यर्पण न कर दे. इसलिए उसने राजनीति की राह पकड़ी. उसने निचले सदन का चुनाव लड़ा और जीत गया. लेकिन न्याय मंत्री ने उसे बर्खास्त कर दिया. पाब्लो ने न्याय मंत्री का कत्ल करा दिया. 1989 में ही लिबरल पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को भी एस्कोबार के लोगों ने मार डाला. इसके बाद सरकार और ड्रग माफिया के बीच युद्ध छिड़ गया. एक समझौते के तहत (कहा जाता है कि इसके लिए भी एस्कोबार ने मोटी रिश्वत दी थी) खुद को एक निजी जेल में कैद कर लिया. इसे ला कैटेड्रल जेल कहा जाता है. इसमें फुटबॉल मैदान जैसी सुविधा भी थी जहां कोलंबिया के बड़े फुटबॉल खिलाड़ी खेलने आते थे.

1991 में डियेगो माराडोना के पास संदेशा पंहुचाया गया कि कोलंबिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण आदमी चाहता है कि वे उसके लिए मैत्री मैच खेलें. माराडोना को ला कैटेड्रल जेल ले जाया गया. एक साक्षात्कार में माराडोना उस अनुभव के बारे में बताते हैं, ‘मैं हज़ारों गार्ड्स से घिरा था. ऐसा लग रहा था जैसे मैं गिरफ्तार कर लिया गया हूं. जेल के बजाय वह जगह शानदार होटल जैसी लग रही थी.’ माराडोना ने मैच खेला और उन्हें बदले में मोटा भुगतान मिला.

नार्को फुटबॉल में आये पैसे ने ऐसा जुनून पैदा किया था कि 1994 के विश्व कप की तैयारी में जुटी कोलंबिया की टीम 34 में सिर्फ एक मैच हारी थी. लेकिन इसके नुकसान भी थे. कोलंबिया के स्टार गोल कीपर को पाब्लो के साथ दोस्ती और एक अपहरण के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया और वे आखिरकार विश्व कप नहीं खेल पाए. भले ही कोलंबिया के फुटबॉल को खड़ा करने में पाब्लो एस्कोबार का बड़ा हाथ रहा हो, लेकिन इस बात को लेकर पूरे देश में हाहाकार था कि कोलंबिया के राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक खिलाड़ी किसी अपराधी से ताल्लुक कैसे रख सकता है.

आखिरकार पुलिस से बचकर भागने की फिराक में 1993 में पाब्लो एस्कोबार को गोली मार दी गई. 1994 के विश्वकप में कोलंबिया को अमेरिका के खिलाफ खेलते देखने के लिए एस्कोबार जिंदा नहीं रहा. उसकी बहन मारिया डॉक्यूमेंट्री ‘टू एस्कोबार्स ‘ में कहती हैं, ‘उसने जो अपने पहले जूते खरीदे थे वे फुटबॉल शूज थे. जब उसकी मौत हुई तो भी उसके पांव में फुटबॉल शूज ही थे.’

नार्को फुटबॉल ने दूसरे एस्कोबार की जान ली

कोलंबिया के फुटबॉल को हमेशा के लिए बदल देना वाला पाब्लो एस्कोबार 1993 में मारा गया. लेकिन ड्रग माफिया के पैसे का असर था कि 1994 की कोलंबियन टीम को पेले जैसे फुटबॉल दिग्गज भी विश्व कप का प्रबल दावेदार मान रहे थे. क्वालीफायर में उसने अर्जेंटीना को 5-0 से हराया था. इस टीम के कप्तान थे एंड्रेस एस्कोबार. इस एस्कोबार का पाब्लो एस्कोबार से कोई संबंध नहीं था. एंड्रेस एक धर्मिक शख्स थे. रोज बाइबिल पढ़ने वाले. लेकिन वे कोलंबियाई फुटबॉल में आ रहे पैसे के स्रोत को लेकर हमेशा परेशान रहते थे. शायद उन्होंने अपनी नियति भांप ली थी.

पाब्लो की मौत के बाद मेडेलिन का ड्रग माफिया बेलगाम था. उस बेहतरीन कोलंबियाई टीम पर ड्रग माफिया का भारी दबाव था. खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करने की धमकियां मिलती थीं. पाब्लो की तरह उनके लिए फुटबॉल पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं था. टीम के प्रदर्शन पर लाखों का सट्टा लगा था. इसी दबाव में एंड्रेस एस्कोबार ने विश्व कप के मैच में अमेरिका के खिलाफ खुद के गोल में गेंद मार दी. कोलंबिया के मैच हारने के कुछ दिनों के बाद एंड्रेस एस्कोबार की गोली मारकर हत्या कर दी गई.

कोलंबियन फुटबॉल का सुनहरा युग शुरू होने से पहले खत्म हो गया. धमकियों से भयभीत खिलाड़ियों ने नेशनल टीम के लिए खेलना छोड़ दिया. जिस नारकोटिक्स के पैसे ने फुटबॉल को संवारा था, उसी नार्को फुटबॉल ने सब तबाह कर दिया. टीम फीफा रैंकिंग में चार से 34 नंबर पर आ गई. लोगों ने कहा कि अगर पाब्लो एस्कोबार जिंदा होता तो ऐसा न होता. लेकिन कितना अच्छा होता अगर ड्रग माफिया का पैसा फुटबॉल में न लगा होता.