सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया का निजीकरण अब नहीं होगा. कम से कम चुनावी साल में यानी 2019 के लोकसभा होने तक तो यह प्रक्रिया थमी ही रहेगी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक उच्चस्तरीय बैठक में इस आशय का फैसला किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उच्चस्तरीय बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के घर पर हुई थी. इसमें फिलहाल अंतरिम और अतिरिक्त रूप से वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे (क्योंकि अरुण जेटली अभी किडनी प्रत्यारोपण संबंधी ऑपरेशन के बाद आराम कर रहे हैं) रेल मंत्री पीयूष गोयल, नागरिक उड्‌डयन मंत्री सुरेश प्रभु तथा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी थे. इनके अलावा वित्त एवं नागरिक उड्‌डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौज़ूद थे.

इस बैठक में मौज़ूद रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘एयरलाइंस को लगातार अपनी उड़ानों के संचालन में मुनाफ़ा हो रहा है. कोई भी उड़ान खाली नहीं जा रही है. लागत कम करने के सभी उपाय सख़्ती से लागू किए जा रहे हैं. एयरलाइंस की संचालन क्षमता बढ़ाने व लागत कम रखने की और भी कोशिशें की जा रही हैं. ऐसे में एयरलाइंस के विनिवेश की जल्दबाज़ी करने की फिलहाल कोई ज़रूरत नहीं महसूस होती. इसीलिए विनिवेश प्रक्रिया को रोकने का फैसला किया गया है.’

सूत्र बताते हैं कि अब एयरइंडिया के संचालन को बेहतर करने के लिए मोदी सरकार उसे वित्तीय मदद देगी. उसके लिए कुछ नए विमानों की ख़रीद की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है. इसके अलावा एयर इंडिया को शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कराने की भी तैयारी की जा रही है. बताते चलें कि इससे पहले सरकार काफ़ी समय तक एयर इंडिया में अपनी 76 फ़ीसदी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेचने की कोशिश करती रही लेकिन किसी कंपनी ने इसमें अपनी दिलचस्पी नहीं दिखाई थी.