पिछले हफ़्ते हमने आपको बताया था कि कैसे सोशल मीडिया पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में जाने के लिए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के व्यवहार को ज़िम्मेदार बताया जा रहा था. एक पुरानी तस्वीर और पूर्व राष्ट्रपति की किसी किताब के आधार पर कहा जा रहा था कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रणव मुखर्जी को सम्मान नहीं देती थीं इसलिए उन्होंने आरएसएस के कार्यक्रम में जाने का फ़ैसला किया.

आज हम आपको देश के वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को लेकर फैलाई जा रहीं भ्रामक और झूठी जानकारियों का सच बताएंगे. ये जानकारियां भी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की कुछ तस्वीरों के ज़रिये फैलाई जा रही हैं. इनमें वे भाजपा नेताओं को नमस्कार करते दिख रहे हैं, जबकि भाजपा नेता ऐसा नहीं कर रहे. इन तस्वीरों के आधार पर सोशल मीडिया पर दो तरह के दावे किए जा रहे हैं. पहला, राम नाथ कोविंद दलित हैं इसलिए राष्ट्रपति होते हुए भी भाजपा के लोग उनका सम्मान नहीं करते. दूसरा, राम नाथ कोविंद पूर्व राष्ट्रपति एमके नारायणन की तरह स्वाभिमानी न होकर एक ‘दब्बू दलित राष्ट्रपति’ हैं. नीचे ऐसी कुछ तस्वीरें देखी जा सकती हैं.

इन तस्वीरों में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता उमा भारती का झुक कर अभिवादन करते दिख रहे हैं. लेकिन ये सभी उन्हें प्रणाम नहीं कर रहे. प्रधानमंत्री मोदी की मुख मुद्रा देख कर तो लग रहा है कि वे राष्ट्रपति से नाराज़ हैं.

हालांकि सही जानकारी इन तस्वीरों को लेकर किए जा रहे दावों को ग़लत साबित करती है. शुरुआत योगी आदित्यनाथ और उमा भारती की तस्वीर से करते हैं. इन तस्वीरों में दोनों भाजपा नेताओं के सामने ‘राष्ट्रपति’ राम नाथ कोविंद नहीं बल्कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राम नाथ कोविंद विनम्रता से समर्थन मांग रहे हैं. तस्वीर 23 जून, 2017 की है. उस दिन राम नाथ कोविंद का राष्ट्रपति चुनाव का नामांकन भरवाने के लिए नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के सभी दिग्गज उनके साथ गए थे. उस दौरान राम नाथ कोविंद उन सभी के प्रति आभार प्रकट किया था. उसी दौरान ये तस्वीरें ली गई थीं.

तस्वीर : बिज़नेस स्टैंडर्ड
तस्वीर : बिज़नेस स्टैंडर्ड

यह भी बता दें कि ऐसा करते समय राम नाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल भी नहीं थे. नामांकन भरने से तीन दिन पहले यानी 20 जून, 2017 को उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. राजनीतिक शिष्टाचार के लिहाज़ से देखें तो चुनाव प्रत्याशी के रूप में किसी व्यक्ति से इसी तरह की विनम्रता की उम्मीद की जाती है.

दूसरी तस्वीर में राम नाथ कोविंद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को प्रणाम कर रहे हैं. इस तस्वीर की तुलना पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की उसी तस्वीर से कर सकते हैं जिसमें वे तो सोनिया गांधी को प्रणाम कर रहे हैं लेकिन, सोनिया गांधी ने कथित रूप से उन्हें नज़रअंदाज़ किया था. वह दावा झूठा था. और यह दावा भी झूठा है कि अमित शाह ने राम नाथ कोविंद को प्रणाम नहीं किया था. नीचे आप वह तस्वीर देख सकते हैं जिसमें अमित शाह भी उस समय निर्वाचित राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को हाथ जोड़ कर प्रणाम कर रहे हैं. भ्रम फैलाने वालों ने केवल राम नाथ कोविंद के प्रणाम वाली तस्वीर शेयर की.

तस्वीर : गेटी इमेजिस
तस्वीर : गेटी इमेजिस

अब आते हैं उस तस्वीर पर जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को प्रणाम नहीं करने के साथ नज़रअंदाज भी किया था. यह तस्वीर इसी साल 30 जनवरी की है. उस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 70वीं पुण्यतिथि के मौक़े पर राजघाट में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. प्रधानमंत्री समेत सभी दलों के नेतागण और मेहमान राष्ट्रपति के आने का इंतज़ार कर रहे थे. जब वे राजघाट पहुंचे तो सभी ने उनका स्वागत किया. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर उसी समय की है.

अब जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को प्रणाम किया था या नहीं और उनकी अनदेखी की थी या नहीं, लेकिन एक अलग ‘एंगल’ से.

यह तस्वीर भी उसी क्षण की है जब राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद प्रधानमंत्री मोदी को प्रणाम करते हुए निकल रहे थे. सोशल मीडिया पर जो तस्वीर वायरल है वह सामने के एंगल से ली गई है. इस वजह से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच की दूरी का पता नहीं चलता. देखकर लगता है मानो राम नाथ कोविंद, नरेंद्र मोदी को नज़दीक से प्रणाम कर रहे हैं लेकिन, नरेंद्र मोदी उनकी अनदेखी कर रहे हैं. हालांकि इस तस्वीर से साफ़ हो जाता है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच पर्याप्त दूरी थी.

लेकिन इस तस्वीर से यह पता नहीं चलता कि नरेंद्र मोदी ने वाक़ई राष्ट्रपति की अनदेखी की थी या नहीं, क्योंकि प्रणाम करते वक़्त प्रधानमंत्री का चेहरा राष्ट्रपति की तरफ़ नहीं है.

इसकी वजह है इस तस्वीर का उस समय, या कहिए उस क्षण में खिंचना जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति को प्रणाम कर चुके थे. नीचे दिखाए गए वीडियो से यह साफ़ हो जाता है कि नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति का हाथ जोड़ कर स्वागत किया था और उसके बाद वे उनके पीछे भी गए थे. इसे देखने के बाद सोशल मीडिया का दावा झूठा साबित हो जाता है. यह भी पता चलता है कि स्पष्ट तस्वीरों से किसी घटना की सही जानकारी मिल जाए यह ज़रूरी नहीं है.

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एक जानकारी और. राम नाथ कोविंद की पुरानी तस्वीरें देख कर लगता है कि झुक कर प्रणाम करना उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है. राष्ट्रपति बनने से बहुत से पहले वे इसी तरह लोगों का अभिवादन कर रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनकी ये तस्वीरें इसका सबूत हैं.