केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को रिहा करने का विरोध किया है. द हिंदू के अनुसार इससे जुड़े तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव को खारिज करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, ‘दोषियों में तीन भारतीयों के साथ शामिल चार विदेशियों को रिहा करना एक खतरनाक उदाहरण स्थापित करेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद को जन्म देगा.’ मंत्रालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की विदेशी आतंकियों की मदद से योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ठप कर दिया था. मंत्रालय के मुताबिक यह हत्याकांड देश में किए गए अपराधों में सबसे अलग था.

बीते हफ्ते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजीव गांधी हत्याकांड के सातों दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. इन दोषियों में मुरुगन, एजी पेरारिवलन, टी सुदेनराजा, जयकुमार, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और नलिनी शामिल हैं. इस बीच एजी पेरारीवलन की मां ने अपने बेटे के लिए दया मृत्यु की इजाजत मांगी है. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने बेटे को अब और तकलीफ में नहीं रहने देना चाहती. मैं दया मृत्यु के लिए राज्य और केंद्र सरकार को लिखने जा रही हूं.’

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 26 साल पहले तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में 21 मई, 1991 को एक आत्‍मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी. इस मामले में सात लोगों को दोषी करार दिया गया था. तमिलनाडु सरकार बीते चार साल में दोषियों को रिहा करने के लिए केंद्र को दो बार पत्र लिख चुकी है. ये सभी दोषी 20 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं.