मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में अपनी सत्ता बचाए रखना भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती साबित हो सकता है. सूत्रों की मानें तो इन राज्यों में पार्टी अगर पुराने चेहरों के साथ ही चुनाव में उतरती है तो उसकी संभावनाओं को चोट पहुंच सकती है. लिहाज़ा ख़बर है कि इन राज्यों में पार्टी अपने 30 फ़ीसद मौज़ूदा विधायकों का टिकट काट सकती है. संख्या इससे ज़्यादा भी हो सकती है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने अपने ज़मीनी अध्ययन/आकलन के आधार पर भाजपा काे मशविरा दिया है कि इस बार तीनों राज्यों में ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में नए चेहरों को चुनाव में उतारा जाए. बताया जाता है कि इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों ही राज्यों की इकाइयों से कमजोर विधायकों की पहचान करने को कह दिया है. यह प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है. इसके साथ ही जीत की संभावना वाले नए चेहरे भी तलाशे जा रहे हैं.

बताया जाता है कि नए उम्मीदवारों के तौर पर उन लोगों को तवज्ज़ो दी जा सकती है जिन्होंने पिछले कुछ सालों में पार्टी संगठन को मज़बूत करने के लिए पूरे समर्पण के साथ काम किया है. यह प्रक्रिया काफी कुछ वैसी ही है जैसी पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान आजमाई गई थी. ख़बर है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने तीनाें राज्यों के हर मतदान केंद्र से रिपोर्ट मंगाई है. इसी रिपोर्ट के आधार पर विधायकों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार तीन चुनाव से जीतती आ रही है. मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान 13 और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह 15 सालों से मुख्यमंत्री हैं. इसीलिए इन राज्यों में सत्ताविरोधी रुझान की चिंता भाजपा को सबसे ज़्यादा है. राजस्थान में भी वसुंधरा राजे दूसरी बार मुख्यमंत्री बनी हैं. उनकी कार्यशैली के प्रति भाजपा और आरएसएस संगठन में ही जब-तब असंतोष के सुर उभरते रहते हैं. यह भी पार्टी की एक अन्य परेशानी है.