अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बिहार की सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा और जेडीयू (जनता दल-एकीकृत) के बीच जल्द ही टकराव देखने को मिल सकता है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जेडीयू के सूत्रों ने कहा है कि सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर भाजपा जल्द एनडीए के सहयोगियों से बातचीत शुरू करे. वहीं, दूसरी तरफ भाजपा की तरफ से अभी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

हालांकि सूत्रों ने यह नहीं बताया कि जेडीयू कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन यह जरूर कहा कि सीटों का बंटवारा वर्तमान स्थिति के मुताबिक होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सभी सहयोगी बैठक करें और दलों के हिसाब से सीटों का बंटवारा हो. यह काम मौजूदा जमीनी हकीकत के आधार पर होना चाहिए.’ यह पूछने पर कि अगर भाजपा पिछले लोकसभा चुनावों के आधार पर सीटें बांटने की बात कहे तो? इस पर सूत्र कहते हैं, ‘उन्हें (भाजपा) यह समझना होगा कि यह 2014 नहीं बल्कि 2019 है.’

सूत्रों ने हालिया उपचुनावों के नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों की पसंद में बदलाव आया है. लिहाजा सीटों के बंटवारे के लिए पिछले चुनावों को आधार बनाना सही नहीं होगा. ग़ौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने बिहार की 40 में 31 सीटें जीती थीं. इनमें से 22 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. हालांकि उस वक़्त जेडीयू एनडीए का हिस्सा नहीं थी. तब उसे सिर्फ दो सीटें मिली थीं.

जेडीयू के सूत्रों का कहना है कि अगर लोक सभा चुनाव परिणाम को सीटों के बंटवारे का आधार बनाना है तो हालिया चुनाव को भी आधार बनाया जाए. साथ ही 2015 के विधानसभा चुनाव का भी आंकलन किया जाए जिसमें जेडीयू ने 71 और भाजपा ने 53 सीटें जीती थीं.