थोड़ी देर से सही पर भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा का कर्ज़ लेकर लंदन भाग चुके शराब कारोबारी विजय माल्या पर भारतीय एजेंसियां अपना शिकंजा कसती जा रही हैं. काले धन से जुड़े मामलों की जांच करने वाली एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस क्रम में शुक्रवार को मुंबई की अदालत में एक अर्ज़ी दायर की है. इसमें विजय माल्या को ‘भगोड़ा अपराधी’ घोषित करने की मांग की गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ईडी ने इसके साथ अदालत से मांग की है कि उसे विजय माल्या की 12,500 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति ज़ब्त करने की इजाज़त दी जाए. यहां बताते चलें केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अभी हाल में ही भगोड़े आर्थिक अपराधी अध्यादेश लागू किया है. इसमें जांच एजेंसियों को कर्ज़ न चुकाने वालों की सभी संपत्तियां ज़ब्त करने का अधिकार दिया गया है. ईडी अदालत से इसी कानून के तहत माल्या की चल-अचल संपत्तियों को तुरंत ज़ब्त करने की इजाज़त मांगी है.

ख़बरों के मुताबिक अभी मौज़ूदा काूनन- पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट) के तहत भी विजय माल्या की संपत्तियां ज़ब्त की जस सकती हैं. लेकिन यह तभी हो सकता है कि जब माल्या के ख़िलाफ़ चल रहा मुकदमा पूरा हो जाए और उन्हें दोषी मान लिया जाए. चूंकि इस प्रक्रिया में काफ़ी वक़्त लगता है इसीलिए ईडी ने नए कानून (अध्यादेश) के तहत माल्या की संपत्तियां तुरंत ज़ब्त करने के लिए अर्ज़ी लगाई है. इसके साथ ही उसने अदालत में वे तमाम सबूत भी पेश किए हैं जिनसे विजय माल्या को ‘भगोड़ा अपराधी’ घोषित कराया जा सके. इस बाबत ईडी ने के तहत दो आरोप पत्र दायर किए हैं. इन्हीं आरोप पत्रों में तमाम सबूतों का ज़िक्र है.

बताते चलें कि भगोड़े आर्थिक अपराधी विधेयक-2018 को केंद्र सरकार ने इसी साल 12 मार्च काे लोक सभा में पेश किया था. लेकिन विभिन्न मसलों पर संसदीय कार्यवाही में लगातार गतिरोध बने रहने के चलते इस विधेयक पर चर्चा ही नहीं हो सकी. इसके बाद केंद्र सरकार ने इस कानून को अध्यादेश के ज़रिए लागू किया है.